विज्ञापन की दुनिया भी निराली है. जनमानस जहां जुड़ा विज्ञापनों की भरमार शुरू हो जाती है. भारत में क्रिकेट मैच पर दर्शक लट्टू हैं और पैसे की बाढ़ है इसलिए क्रिकेट में सट्टेबाजी जैसी गैरकानूनी गतिविधियां भी सुर्खियों में रहती हैं. विज्ञापनों पर तो पैसा पानी की तरह बहाया जाता है. एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, क्रिकेट टी-20 के विज्ञापनों में कमाई 2008 के मुकाबले 2013 में 92 फीसदी बढ़ी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2008 में भारतीय खेल उद्योग में विज्ञापन का कारोबार 2,139 करोड़ रुपए का था जो 2013 में 4,109 करोड़ रुपए तक पहुंचा है. यह चुनावी वर्ष है और इस साल चुनावी विज्ञापनों के साथ ही टी-20 क्रिकेट मैच के विज्ञापनों पर भी खर्च हो रहा है.

पिछले वर्ष यानी 2013 में टी-20 क्रिकेट मैच के दौरान 10 सैकंड के विज्ञापन के प्रसारण के लिए साढ़े 4 लाख रुपए खर्च करने पड़ रहे थे जो इस साल साढ़े 5 लाख रुपए हो गया है. विज्ञापन प्रसारकों को पिछले वर्ष टी-20 इंडियन क्रिकेट लीग से 900 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी, जिस के इस साल 1,080 करोड़ रुपए से अधिक रहने के आसार हैं.

टी-20 क्रिकेट में विज्ञापन की दर किस कदर बढ़ रही है, इस का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि 2008 में लीग मैचों में प्रसारण क्षेत्र को 300 करोड़ रुपए के विज्ञापन मिले थे. इसी तरह से इन मैचों के दर्शकों की संख्या भी बढ़ रही है. 2008 में क्रिकेट टीवी दर्शकों की संख्या 4.81 करोड़ थी जो 2009 में घट कर 4.17 करोड़ रह गई थी. 2012 में 16.50 करोड़ दर्शकों ने ये मैच देखे जबकि 2013 में यह संख्या बढ़ कर 21.50 करोड़ पहुंची.

दरअसल, चुनावी वर्ष में लीग मैच विदेशों में कराए गए जिस से दर्शक संख्या घटी लेकिन इस बार के चुनाव का ज्यादा असर दर्शकों पर नहीं रहने की संभावना जताई जा रही है और उम्मीद की जा रही है कि लीग मैचों में विज्ञापनों के साथ ही टीवी दर्शकों की संख्या भी बढ़ेगी.