‘हेट स्टोरी-3’ सीरीज की यह तीसरी फिल्म है. आप को बता दें कि इस सीक्वल की चौथी फिल्म भी बनेगी. पिछली दोनों फिल्मों की अपेक्षा यह कुछ ज्यादा ही हौट है. अगर इसे ‘हेट स्टोरी’ न कह कर ‘हौट स्टोरी’ कहा जाए तो उपयुक्त होगा. फिल्म में जम कर कामुकता परोसी गई है. अब तक कई फिल्में कर चुकी जरीन खान फ्लौप ही रही है. इस फिल्म में उस ने जम कर कामुक सीन दिए हैं. फिल्म की दूसरी महिला किरदार डेजी शाह ने भी खूब अंग प्रदर्शन किया है.

फिल्म में 2 पुरुषों की जंग और अहं को दिखाया गया है. फिल्म में निर्देशक ने सभी मसालों को भर कर दर्शकों को खींचने का प्रयास किया है. फिल्म रिवैंज ड्रामा है. निर्देशक ने अंत तक यह सस्पैंस बनाए रखा है कि कौन किस से बदला ले रहा है. यह सस्पैंस फिल्म खत्म होने से सिर्फ 2 मिनट पहले ही जाहिर होता है.

फिल्म की कहानी विक्रम भट्ट ने लिखी है. उस ने रिश्तों के तानेबाने को इस प्रकार बुना है कि दर्शकों की रुचि यह जानने में लगी रहती है कि आगे क्या होने वाला है.

फिल्म की कहानी एक उद्योगपति आदित्य दीवान (शरमन जोशी) की है. सिया (जरीन खान) उस की बीवी है. दोनों की जिंदगी में एक दिन एक अन्य उद्योगपति सौरव सिंघानिया (करन सिंह ग्रोवर) आ जाता है. सौरव आदित्य और सिया को अपने घर बुला कर आदित्य से कहता है कि वह एक रात के लिए सिया को उस के पास भेज दे. यहीं से दोनों एकदूसरे के दुश्मन हो जाते हैं. सौरव सिंघानिया आदित्य को बरबाद करने की ठान लेता है. वह आदित्य की फैक्टरी को बंद करा देता है. आदित्य सौरव की चाल को काटने के लिए अपनी सैक्रेटरी काया (डेजी शाह) को सौरव के घर भेजता है ताकि उसे पलपल की खबर मिलती रहे. लेकिन सौरव काया को मरवा कर उलटे आदित्य को फंसा कर उसे जेल भिजवा देता है.

सिया अकेली पड़ जाती है. वह सौरव के पास जाने के बदले आदित्य की बेगुनाही के सारे सुबूत सौरव से देने की रिक्वैस्ट करती है. सारे सुबूत ले कर वह सौरव को जहर दे देती है. सौरव के आदमी उसे अस्पताल पहुंचा देते हैं. होश में आते ही सौरव आदित्य और सिया को मारने पहुंच जाता है. वह एकएक कर दोनों को मार डालता है.

अंत में भेद खुलता है कि सौरव कौन है. दरअसल, सौरव आदित्य के बड़े भाई विक्रम दीवान (प्रियांशु चटर्जी) का बचपन का दोस्त है. बचपन में विक्रम ने अपना आधा लिवर दे कर उस की जान बचाई थी और उस के भाई आदित्य ने उस की प्रेमिका को फंसा कर उस से शादी कर ली थी.

फिल्म की पटकथा भी विक्रम भट्ट ने लिखी है. पटकथा चुस्त है. फिल्म में तीखे टर्न्स और ट्विस्ट हैं. निर्देशक की मंशा दोनों अभिनेत्रियों के जिस्म को दिखाने की ही रही है. इस के बावजूद फिल्म अपने उद्देश्य से नहीं भटकती तो इसलिए क्योंकि फिल्म का संपादन कसा हुआ है. निर्देशन भी काफी हद तक ठीकठाक है.

शरमन जोशी को एक उद्योगपति की भूमिका नहीं जंचती. जब वह शर्ट के बटन खोलता है तो भद्दा लगता है और जब शर्ट के बटन बंद करता है तो जैंटलमैन लगता है. करन सिंह ग्रोवर ने खलनायकी अंदाज बखूबी दिखाए हैं. वह शरमन जोशी पर भारी पड़ा है. फिल्म में कई गाने हैं. गानों को अच्छी तरह फिल्माया गया है. ‘तुम्हें अपना बनाने की…’ गाना अच्छा बन पड़ा है. फिल्म का छायांकन बढि़या है.

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