रसीला गुलाबजामुन देश की सब से मशहूर मिठाई है. गुलाबजामुन बनाने वाले इसे ले कर नएनए प्रयोग करने लगे हैं. सब से ज्यादा प्रयोग इस के आकार को ले कर होने लगे हैं. पहले गुलाबजामुन नीबू के आकार बनता था. अब इस के आकार को छोटा कर दिया गया है. इसे मिनी गुलाबजामुन के नाम से जाना जाता है. छप्पन भोग मिठाई शाप के मालिक रवींद्र गुप्ता कहते हैं, ‘आज के समय में लोग मिठाई को भरपेट नहीं खाते. वे स्वाद लेने के लिए मिठाई खाते हैं. ऐसे में मिनी गुलाबजामुन भी चलन में आ गया.’

गुलाबजामुन का नाम गुलाब और जामुन से मिल कर बना है. यह अपनी तरह की अलग मिठाई है, जिस का नाम फल और फूल पर रखा गया है. गुलाबजामुन की चाशनी को बनाने के लिए गुलाबजल को खुशबू के लिए डाला जाता है और जामुन के गोल आकार और रंग के कारण इसे गुलाबजामुन कहा जाता है. गुलाबजामुन मुगल काल की मिठाई है. गुलाबजामुन भारत और दूसरे मुसलिम देशों की खास मिठाई है. अब दुनिया में जहांजहां भारतीय रहते हैं, वहांवहां मिठाई  की दुकानों में गुलाबजामुन मिलता है.

चाशनी में डूबा गुलाबजामुन गरमगरम खाने में ही मजा देता है. कोई दावत गुलाबजामुन के बिना अधूरी मानी जाती है. अगर आप गरम और ठंडा स्वाद एकसाथ लेना चाहते हैं, तो गुलाबजामुन और वनीला आइसक्रीम को मिला कर खाया जा सकता है. एक बार इस अंदाज में गुलाबजामुन का स्वाद लेंगे, तो किसी और मिठाई का स्वाद याद ही नहीं रहेगा.

गुलाबजामुन और कालाजाम में अंतर

मिठाई की दुकानों पर गुलाबजामुन से मिलतीजुलती एक और मिठाई दिख जाती है, जिसे कालाजाम कहा जाता है. आमतौर पर लोग कालाजाम और गुलाबजामुन को एक ही मिठाई समझ बैठते हैं, मगर इन में फर्क होता है. गुलाबजामुन चाशनी में डूबा होता है, जबकि कालाजाम सूखा होता है. गुलाबजामुन गरम खाया जाता है और कालाजाम सामान्य तापमान में रख कर खाया जाता है. गुलाबजामुन खोए से तैयार होता है और इस के अंदर कुछ भरा नहीं जाता, जबकि कालाजाम में अंदर मेवाइलायची जैसी दूसरी चीजें डाली जाती हैं. गुलाबजामुन को चांदी के वर्क से सजाया नहीं जाता है, जबकि कालाजाम को चांदी के वर्क और केसर पाउडर से सजाया जाता है. कालाजाम गोल आकार का ही बनता है, जबकि गुलाबजामुन गोल और लंबे दोनों आकारों में बनते हैं. इन के स्वाद में भी अंतर होता है. गुलाबजामुन पंजाबी मिठाई होती है, जबकि कालाजाम बंगाली मिठाई होती है.

कैसे बनता है गुलाबजामुन

गुलाबजामुन बनाने के लिए खोया, मैदा, बेकिंग पाउडर और इलायची पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है. सब से पहले खोए को कद्दूकस कर लें. फिर उस में मैदा, बेंकिग पाउडर और इलायची पाउडर मिला लें. इस में थोड़ा दूध डालते हुए आटे की तरह गूंध लें. जब यह खूब चिकना जाए तो मनचाहे गोल या लंबे आकार में गुलाबजामुन तैयार कर लें. ध्यान रखें कि ये फटे नहीं.  फटने से इन में दरारें पड़ जाती हैं. तैयार कच्चे गुलाबजामुन को कपड़े से ढक  कर रख दें. इस के बाद कढ़ाई में जरू रत के अनुसार तेल डाल कर इन्हें तल लें. जब ये ब्राउन कलर के हो जाएं,  तो इन को बाहर निकाल लें और किचन पेपर पर रखें.

इस के बाद चीनी और पानी बराबर मात्रा में ले कर चाशनी बनाएं. इसे धीमी आंच पर गरम करें. जब चाशनी तैयार हो जाए, तो तले गुलाबजामुन उस में डाल दें. चाशनी में कुटी इलायची, गुलाबजल और केसर डाल दें. जब गुलाबजामुनों के अंदर तक रस घुल जाए, तो उन को निकाल कर गरमगरम खाएं. चाशनी में भीगे होने के कारण इन को गरम करना आसान होता है.