सरिता विशेष

रसीली और सूखी गुझिया खाने का समय होली के करीब होता है. गुझिया के बिना होली जैसा त्योहार नहीं मनाया जा सकता. गुझिया के सामान्य आकार से अलग गोल आकार की गुझिया अब लोगों को पसंद आने लगी है. गोल गुझिया बनाने के लिए अच्छे किस्म के गेहूं के मैदे का प्रयोग किया जाता है. उत्तर प्रदेश के सभी छोटेबड़े जिलों में यह मिठाई खूब बिकती है. गुझिया पूरे साल बाजार में मौजूद रहती है. त्योहारों पर बंगाली मिठाइयों के साथ इस का सीधा मुकाबला होता है. अपने रसीले स्वाद के चलते इस की बहुत मांग रहती है. यह कई दिनों ताक खराब नहीं होती है. इस कारण लोग इसे ज्यादा मात्रा में खरीद कर घर लाते हैं और इसे गरम कर के भी खाते हैं. गोल गुझिया बनाने के लिए किसी बड़े कारीगर की जरूरत नहीं होती. यह बेहद आसानी से बनाई जा सकती है. गोल गुझिया बनाने में सब से मेहनत का काम इसे सही आकार देने का होता है. यह लंबे समय तक रखी जा सकती है.

कैसे बनाएं गोल गुझिया

सामग्री : 200 ग्राम मैदा, 250 ग्राम खोया, 1 किलोग्राम चीनी, 20 ग्राम मिश्री, 10 बादाम, 20 पिस्ते, 5 छोटी इलायची, आधा चम्मच केसर, 2 चांदी के वर्क, तलने के लिए जरूरत के हिसाब से तेल या घी.

विधि : गोल गुझिया तैयार करने के लिए पहले बादाम और पिस्ते छील कर महीन काट लें. इलायची छील कर महीन कूट लें. मिश्री के दाने चने की दाल के आकार में तोड़ लें. खोया कस लें और उस में मेवा, मिश्री, इलायची और केसर मिला लें. इस मिश्रण के 8 हिस्से कर दें. मैदे में घी डाल कर कड़ा गूंध लें. इस की समान आकार की 16 लोइयां बना लें. हर लोई को 3 इंच गोल बेल लें. एक पूरी पर एक हिस्सा मसाला रख कर दूसरी पूरी से ढक दें. इस के बाद इस के किनारों को हाथ की उंगलियों के सहारे गूथ दें. ऊपर और नीचे की पूरियों को एकदूसरे से मिला दें. गुझिया के किनारे देखने में गोल रस्सी जैसे लगेंगे. यही काम थोड़ा कठिन होता है. इस के बाद चीनी की 1 तार की चाशनी बना लें. घी गरम कर के मध्यम आंच पर गुझियों को गुलाबी होने तक तलें. इस के बाद उन्हें कड़ाही से निकाल कर तुरंत गरम चाशनी में डाल दें. गुझियों को 15 से 20 मिनट तक चाशनी में पलटते रहें. इस के बाद उन को बाहर निकाल लें और उन पर चांदी का वर्क लगा दें.

अलग स्वाद देती है गरमगरम गुझिया

गोल आकार वाली गुझिया काफी पसंद की जाने वाली मिठाई है. इस के अंदर मेवे वाला मसाला भरा होता है, जिस से खाने का अलग स्वाद आता है. इसे गरम खाने में ज्यादा मजा आता है. जिन लोगों के पास ओवन है, वे इस का मजा गरम खा कर ले सकते हैं. इस के अलावा जो लोग ऐसे ही खाना चाहते हैं, उन को भी इस का स्वाद पसंद आता है. मिठाई की दुकान से यह गरम ही दी जाती है. जो लोग इसे अपने शहर से दूर ले जाना चाहते हैं, उन के लिए यह सुविधाजनक होती है. इस का रस अंदर भरा रहता है. ऐसे में यह खराब नहीं होती है. यह सभी उम्र के लोगों को पसंद आती है. जिन लोगों को ज्यादा चीनी वाली मिठाई खाने से परहेज होता है, उन के लिए शुगरफ्री गुझिया भी कई मिठाई की दुकानों में मिलने लगी है. मिठाईखोर खुशी कहती है कि उसे इस का स्वाद बहुत अच्छा लगता है. यह लंबे समय तक चलती है. इस में खराब होने वाला कुछ नहीं होता. इस के स्वाद की ही तरह इस का नाम भी सुंदर है.

जरूरी है सही आकार

गोल गुझिया बनाने में खास ध्यान रखने वाली बात यह होती है कि यह कहीं से खुले नहीं. अगर यह खुल जाएगी तो अंदर भरा हुआ मेवा बाहर निकल आएगा और यह देखने में अच्छी नहीं लगेगी. साथ ही साथ जिस तेल में  तली जाएगी वह भी खराब हो जाएगा. इस का आकार भी सही होना चाहिए. इसे पूरी तरह गोल आकार में बनाना चाहिए. ऊपर और नीचे की दोनों गोल आकार वाली पूरियों को ऐसे मिलाना चाहिए, जिस से यह देखने में अच्छी लगे. मोड़े हिस्से पर चाशनी रुक जाती है, जिस से गोल गुझिया रसीली दिखती है. गोल गुझिया अलगअलग दामों की होती है. देशी घी वाली गुझिया की कीमत 300 रुपए प्रति किलोग्राम और सामान्य गुझिया की कीमत 180 से 200 रुपए प्रति किलोग्राम होती है.