सरिता विशेष

विवाहित महिलाओं का आत्मविश्वास अब रीतियों और रूढियों की बंदिशों को तोड कर आगे बढ रहा है. ‘मिसेज इंडिया’ और ‘मिसेज वर्ल्ड’ जैसी बहुत सी प्रतियोगिताएं नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर आयोजित होती रहती है. इनमें बडे शहरों की विवाहित महिलायें हिस्सा लेती है. अब केवल बडे शहरों की विवाहित महिलायें ही रैंप पर कैटवाक नहीं कर रही है. छोटे शहरों और कस्बों तक की महिलायें भी मौका मिलने पर पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर कैटवाक कर रही है.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की बक्शी का तालाब तहसील के एसआर ग्रुप औफ इंस्टीटयूट में ‘दिल्ली प्रेस’ की पत्रिका ‘गृहशोभा’ ने फैशन शो का आयोजन किया. इस शो के फाइनल राउंड में जिन 15 लोगों को स्थान मिला, उनमें 6 महिलायें न केवल शादीशुदा है उनके बडे बडे बच्चे भी है. फैशन शो में 3 प्रतिभागियों को बेस्ट पर्सनल्टी का खिताब दिया गया. उनमें भी एक खिताब विवाहित महिला किरन भदौरिया के नाम रहा.

फैशन शों में पहली बार बिना किसी तैयारी के उतरी इन मम्मियों ने प्रोफेशनल मौडल की तरह की रैंप पर केवल कैटवाक ही नहीं किया बल्कि उसी अंदाज में लटके झटके भी दिखाये. इनमें किरन भदौरिया, ममता सिंह, प्रीति श्रीवास्तव, विनीता सिंह, आरती वाजपेई और स्वाती सिंह शामिल थी. किरन की 9 साल की बेटी दृष्टि और 5 साल का बेटा सूर्य है. जो कक्षा 4 और 1 में पढते है. ममता सिंह की 9 साल की बेटी काव्यांजलि कक्षा 4 में पढती है. आरती के 2 बच्चे है. वरीशा कक्षा 4 और समृद्वि कक्षा 1 में पढते है. प्रीति श्रीवास्तव का बेटा तन्मय कक्षा 12 में और शिवालिका कक्षा 8 में पढती है. विनीता सिंह के 2 बच्चे आदित्य कक्षा 4 और अरंशा कक्षा 2 में पढती है. पहली बार रैंप शों करने उतरी इन महिलाओं का आत्मविश्वास देखने वाला था. अपने से कम उम्र की लडकियों से किसी भी तरह से यह पीछे नहीं थी.

बक्शी का तालाब लखनऊ जिले की एक तहसील है. वहां की महिलाओं में ऐसा आत्मविश्वास देखने वाला था. बात करने पर पता चला कि यह सभी आत्मनिर्भर है. स्कूल में पढाने का काम करती है. वह न केवल अपने क्लास के बच्चों में आत्मविश्वास भरती हैं बल्कि खुद भी पूरे आत्मविश्वास से भरी हुई है. इनका कहना है कि हम अपने जौब के साथ ही साथ घर परिवार और बच्चों को भी पूरा वक्त देते है. शुरू शुरू में जब महिलायें बाहर निकलती है तो लोग बातें करते है उनकी बातों की परवाह न करते हुये आगे बढने की जरूरत होती है. एक बार आप सफल होते हो तो वही लोग आपको सम्मान देने लगते है और आपका उदाहरण दूसरों को देते है. एसआर ग्रुप औपफ इंस्टीटयूट के पवन सिंह चोहान कहते है ‘जरूरत है कि हम पुरानी रीतियों और रूढियों को तोड कर जमाने के साथ आगे बढे. शिक्षा इसका बहुत बडा माध्यम है. शिक्षा ही तरक्की का आधार है.’