सरिता विशेष

वर्तमान दौर में कैरियर में सफलता पाने के लिए दमदार पर्सनैलिटी का होना बहुत जरूरी है. अच्छी स्माइल और सलीके से की गई बातचीत हर कमी को पूरा करती है. आज युवाओं को कम उम्र में ही कैरियर बनाने के मौके मिलते हैं इसलिए अपनी पर्सनैलिटी दमदार बनाने की कोशिश करें.

पर्सनैलिटी वह नहीं होती जो बाहर से दिखती है और पर्सनैलिटी वह भी नहीं होती जो आत्मविश्वास के रूप में झलकती है. दमदार पर्सनैलिटी वह होती है जो इनर और आउटर दोनों में अपना असर छोड़ सके.

आज के इस दौर में ऐसी ही दमदार पर्सनैलिटी की जरूरत है. कई बार तो देखने में पर्सनैलिटी बहुत अच्छी दिखती है लेकिन इस के बाद भी इंसान के अंदर ठोस  आत्मविश्वास नहीं दिखता. कई बार आत्मविश्वास तो होता है पर पर्सनैलिटी उस को सूट नहीं कर रही होती है.

इंसान की इनर और आउटर पर्सनैलिटी में जब समानता और एकरूपता नजर आती है तो उस को परफैक्ट या दमदार पर्सनैलिटी कहा जाता है. कई बार हमें ऐसे लोग दिखते हैं, जिन का ड्रैससैंस बहुत अच्छा होता है लेकिन जब वे बातचीत करते हैं तो लगता है कि पर्सनैलिटी में कहीं कुछ मिसमैच हो रहा है.

कई बार लोग देखने में कतई प्रभावित नहीं करते पर जब वह अपनी बात सामने रखते हैं तो लगता है कि उन में आत्मविश्वास है. देखने वाला खुद महसूस करता है कि यदि ये थोड़ी अपनी आउटर पर्सनैलिटी को निखार लें तो दमदार हो सकते हैं. ऐसे में जरूरत इस बात की है कि इनर और आउटर दोनों ही तरह की पर्सनैलिटी दमदार हो.

आज समाज में काफी बदलाव आया है. ऐसे में इंसान का परफैक्ट बनना जरूरी है. जौब और कैरियर के हर मोड़ पर दमदार पर्सनैलिटी की जरूरत महसूस होती है. सफलता के लिए बहुत जरूरी है कि इंसान दमदार पर्सनैलिटी का हो. ऐसी पर्सनैलिटी बनाना कोई मुश्किल काम नहीं है. जरूरत इस बात की है कि इंसान खुद को बदलने की कोशिश करे.

मनोचिकित्सक डाक्टर नेहा सनवाल कहती हैं, ‘‘आज युवाओं को कम उम्र में ही कैरियर बनाने के मौके मिलते हैं. ऐसे में उन को अपनी पर्सनैलिटी दमदार बनाने की जरूरत है. अगर स्कूल स्तर पर ऐसे प्रयास शुरू हों तो दमदार पर्सनैलिटी बनाने में युवाओं को काफी मौके मिलेंगे. अगर स्कूल स्तर पर ऐसा नहीं हो पाया तो खुद भी अपने स्तर पर ऐसे प्रयास कर सकते हैं. यह समझना चाहिए कि इनर और आउटर पर्सनैलिटी दोनों अलगअलग होती हैं. इन को निखारना चाहिए. इस के लिए खुद की तरफ से बदलाव शुरू होने चाहिए.’’

आउटर पर्सनैलिटी निखारना जरूरी

सब से पहले लोग आउटर पर्सनैलिटी ही देखते हैं. इस का प्रभाव दूसरे पर पड़ता है. कहावत है, ‘फर्स्ट इंप्रैशन इज द लास्ट इंप्रैशन.’ इसलिए आउटर पर्सनैलिटी का जोरदार होना सब से पहली जरूरत होती है. आउटर पर्सनैलिटी में शरीर की कमियों को अपने आत्मविश्वास पर भारी न पड़ने दें.

कई लोगों का रंग साफ नहीं होता, कद छोटा होता है और शरीर भी बहुत भरापूरा नहीं होता है. युवतियों में ब्रैस्ट का छोटा होना भी इस तरह की बातों में आता है. अपनी इन कमियों को लोग अपने व्यक्तित्व पर हावी होने देते हैं, ऐसे में वे जहां भी जाते हैं हीनभावना का शिकार हो जाते हैं.

अपनी आउटर पर्सनैलिटी निखारने के लिए इस तरह की हीनभावना को दूर करना जरूरी है. आज मैडिकल साइंस बहुत तरक्की कर चुका है. शारीरिक कमियों को दूर करने में मैडिकल सर्जरी का बड़ा योगदान है. मैडिकल साइंस के चलते बहुत तरह के बौडी करैक्शन सरल हो गए हैं. फेस की सुंदरता बढ़ाने के लिए होंठ, दांत और नाक जैसे अंगों की कमियों को दूर किया जा सकता है. चेहरे पर पड़ने वाले दागधब्बे भी दूर किए जा सकते हैं.

इस के अलावा अगर किसी तरह का उपाय नहीं हो सकता तो हीनभावना का शिकार होने की जरूरत नहीं होती है. हीनभावना से उबर कर पर्सनैलिटी को निखारने में मानसिक दृढ़ता की जरूरत होती है.

डाक्टर अर्पिता आनंद कहती हैं, ‘‘अच्छी स्माइल और सलीके से की गई बातचीत हर कमी को पूरा कर देती है. ऐसे में जरूरत इस बात की है कि आप बेहतर स्माइल के साथ अपनी बात को पूरे कौन्फिडैंस के साथ सामने रखें. इस के साथ ही अपने ड्रैससैंस को अपडेट रखें. फैशन के चक्कर में कुछ भी न पहनें. जो आप को अच्छा लग रहा हो और आप की बौडी को सूट कर रहा हो वही पहनें. कई बार फिल्मस्टार या दूसरे को देख कर लोग वैसा ही पहन लेते हैं. ऐसा न करें, जो खुद पर सूट करे वही पहनें. इस से आप की आउटर पर्सनैलिटी निखरेगी. आप का सामने वाले पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा.’’

इनर पर्सनैलिटी बहुत जरूरी

सरिता विशेष

आउटर पर्सनैलिटी तो कुछ पल के लिए ही आप का प्रभाव सामने वाले पर डालती है, पर इनर पर्सनैलिटी का असर लंबे समय तक रहता है. इनर पर्सनैलिटी में व्यक्ति की सोच, स्वभाव और जानकारी सभी शामिल हैं. बातचीत करते समय यह देखना जरूरी होता है कि आप जिस विषय पर बात कर रहे हैं आप को उस की पूरी जानकारी हो. हर बात तर्क के साथ सलीके से कहें. कई बार तर्क देते समय ऐसा लगने लगता है जैसे आप अपनी बात को जबरन थोप रहे हों.

तर्क करते समय अपनी बात कहने के साथ ही दूसरे की बात को भी पूरी तरह से सुनना चाहिए. इनर पर्सनैलिटी में जरूरी है कि मन के भाव अच्छे रखें. किसी के प्रति कटुता का भाव न रखें. कटुता, तनाव और गुस्सा इनर पर्सनैलिटी के लिए घातक हैं. कोई भी काम पूरी ईमानदारी से करें, जिस से आप की छवि बेहतर बने.

समाजशास्त्री डाक्टर मधु पाठक कहती हैं, ‘‘इनर ब्यूटी जिस को इनर पर्सनैलिटी भी कहते हैं, यह न हो तो इंसान भावनाहीन हो जाएगा. भावना के बिना इंसान के मानवीय गुण खत्म से होते दिखते हैं. समझदारी, आत्मविश्वास और सच बोलने की हिम्मत इनर पर्सनैलिटी को बढ़ाती है. सब से बड़ी बात यह है कि इनर पर्सनैलिटी आप की सोच को सही दिशा देती है. जब इनर पर्सनैलिटी प्रभावी दिखती है तो बाहरी पर्सनैलिटी भी अच्छी दिखने लगती है.’’

वे कहती हैं कि आउटर पर्सनैलिटी आप के बाहरी प्रभाव की छाप छोड़ती है पर इनर पर्सनैलिटी आप के विचारों से दूसरों को प्रभावित करती है. दोनों मिल कर दमदार पर्सनैलिटी का निर्माण करते हैं. ऐसी पर्सनैलिटी जन्मजात न भी हो तो अपने अंदर इसे पैदा किया जा सकता है.

इस के लिए आप व्यक्तित्व निखारने वाली क्लासेज जौइन कर सकते हैं. आज के समय में कैरियर में सफलता पाने के लिए दमदार पर्सनैलिटी का होना बहुत जरूरी है. ऐसे में पर्सनैलिटी निखारने का काम भी बहुत जरूरी हो गया है.                           

कैसे बनाएं दमदार पर्सनैलिटी

–       अपनी कमियां परख कर उन्हें दूर करने की कोशिश करें. किसी दूसरे की तरह बनने के बजाय खुद की पहचान बनाएं.

–       आजकल पर्सनैलिटी निखारना बिजनैस हो गया है. ऐसे में बिना सोचेसमझे इस तरह के काम करने से बचें. अपने स्वभाव की खुद समीक्षा करें.

–       अपनी वाक्पटुता और चतुराई में आउटर पर्सनैलिटी का तारतम्य बनाए रखें. दोनों में अंतर नहीं दिखना चाहिए. अंतर दिखता है तो पर्सनैलिटी दमदार नहीं दिखती.

–       दमदार पर्सनैलिटी बनाने का प्रयास करें. केवल बाहर से दिखावा भर न करें. दिखावा जल्दी पहचान में आ जाता है.

–       सरलता और सचाई से कही गई बात पर्सनैलिटी को निखारने का काम करती है. झूठ और गलत बोलना अच्छी पर्सनैलिटी की निशानी नहीं है.

–       जिम्मेदारी उठाना और उसे पूरा करना पर्सनैलिटी को निखारने का काम करता है. जरूरत इस बात की है कि जो काम कहें उसे पूरा करें.

–       किसी दूसरे की बुराई कर के कभी आगे नहीं बढ़ा जा सकता. यह आदत जल्द पकड़ में आ जाती है. ऐसे में आप की छवि खराब होती है.

–       दमदार पर्सनैलिटी हर कोई पसंद करता है. ऐसे में खुद पर भरोसा बढ़ता है. झूठी और सच्ची तारीफ में अंतर करना सीखें. इस से आप की पर्सनैलिटी का सामने वाला गंभीरता से आकलन करता है.

–       नियम और कानून का पालन करना भी पर्सनैलिटी का हिस्सा होता है. कई बार अच्छी पर्सनैलिटी का दिखावा करने वाले लोग ऐसा नहीं करते. इस को ओवर कौन्फिडैंस माना जाता है, जो आमतौर पर धोखा देता है.

–       दूसरे का सम्मान करने से अपना भी सम्मान बढ़ता है. ऐसे में खुद के अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है, जो पर्सनैलिटी का सब से अहम हिस्सा है.