सरिता विशेष

पार्क में शाम को तेज गति से चक्कर लगाते हुए प्रिया बड़बड़ा रही थी, ‘मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि नेहा ऐसा काम कर गुजरेगी. कोई बच्ची नहीं है, 30 साल की होने को आई है. शादी के लिए कितने रिश्ते सुझाए पर उसे एक भी पसंद नहीं आया. क्या इसी दिन के लिए उस ने इतने अच्छेअच्छे रिश्ते रिजैक्ट किए?’

आज उस ने अपनी ननद को किसी से फोन पर बात करते हुए सुन लिया था, ‘‘और किस तरह यकीन दिलाऊं तुम्हें कि मैं तुम से कितना प्यार करती हूं. पिछले 1 साल में तुम्हारे लिए हर हद से गुजर चुकी हूं. और एक तुम हो कि न जाने कब अपनी पत्नी को छोड़ोगे. कभीकभी तो मुझे शक होता है कि कहीं तुम मुझे बेवकूफ तो नहीं बना रहे. तुम्हारा उसे छोड़ने का इरादा है भी?’’ नेहा की बातें सुन कर दीवार की ओट में खड़ी प्रिया के पांव तले जमीन खिसक गई थी. पढ़ीलिखी, नौकरीपेशा, शादी के लिए योग्य लड़की किसी शादीशुदा मर्द से उलझी हो तो उस का क्या भविष्य है भला. आज प्रिया की समझ में आ रहा था कि क्यों नेहा अकसर इतनी परेशान रहती थी – उदास, चिड़चिड़ी, सब से नाराज सी. सारा परिवार यह समझता था कि बढ़ती उम्र के साथ शादी के लिए योग्य वरपरिवार न मिलने के कारण नेहा ऐसी होती जा रही थी. लेकिन आज पता चला कि मामला कुछ और है.

विवाहित प्रेमी क्यों?

आप की उम्र प्रेम करने को सटीक. आप के जीवन में अभी तक कोई नहीं आया. ऐसे में आप किसी ऐसे वातावरण में फंस गई हैं जहां आप का मन नहीं लग रहा और तभी एक सुंदर, बांका, सजीला नौजवान वहां आता है. जाहिर है आप का मन उस नौजवान की ओर लपकेगा. पहले दोस्ती, फिर फोन, फिर वाट्सऐप, फिर फेसबुक पर गपशप. फिर धीरे से आप का वह मन जो पहली ही नजर में उस का दीवाना हो गया था, उस की प्यारी बातों, सभ्य व्यवहार की गिरफ्त में कैद हो जाता है. और इस सब के बाद आप को पता चलता है कि वह तो शादीशुदा है. यह बात भी वह स्वयं बताता है अपनी बुरी शादी, खराब पत्नी की कहानियों के साथ. इन सब से वह नजात चाहता है और आप उस के जीवन में बहार के एक ताजा झांके के रूप में आए हो, जिसे वह किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता. बस, उसे कुछ समय चाहिए.

न्यूयौर्क अस्पताल की मनोचिकित्सक, डा. गेल साल्त्ज का मत है कि मर्दों के लिए अफेयर चलाने के कारण हैं – पत्नी के अलावा अन्य महिला से सैक्स, ज्यादा सैक्स, अलग तरीके से सैक्स, पत्नी से दूर भागने के लिए, अपनी जवानी वापस जगाने के लिए या फिर गलत शादी से बाहर निकलने हेतु. वहीं, औरतें भावनात्मक जुड़ाव, देखभाल व सुरक्षा की भावना तथा संपर्क तलाशती हैं. मनोवैज्ञानिक अर्चना त्यागी कहती हैं कि किसी भी भटकन के पीछे कुछ मुख्य कारण होते हैं. मसलन, या तो वह आदतन है या भावनात्मक रूप से कोई एक या दोनों, एकदूसरे की ओर आकर्षित हुए हैं-ऐसा आकर्षण लंबे समय तक रहता है, कभीकभी ताउम्र. ऐसा आकर्षण समय बीतने के बाद अपनेआप फीका पड़ जाएगा जिस से या तो दोनों अलग रास्तों पर चले जाएंगे या फिर कोई एक पीडि़त अवसाद में घिर जाएगा.

विवाहित प्रेमी क्यों नहीं?

यदि विवाहित प्रेमी वाकई प्यार करता है और इस रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहता है तो उसे किसी बहाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी किंतु जो विवाहित प्रेमी कोई न कोई बहाना बना कर बात टालता रहता हो, ऐसे आदमी से अफेयर चलाने में नुकसान है.उस की चिकनीचुपड़ी बातों में आ कर यह न सोचें कि आप उस का भला कर रही हैं, बल्कि अपना नुकसान कर रही हैं.

साथ का वादा : प्रख्यात मनोवैज्ञानिक और लौस एंजिलिस की यूनिवर्सिटी औफ कैलिफोर्निया के प्रोफैसर डा. मार्क गूलस्टन कहते हैं कि आप उस का कितना खयाल रखती हैं या आप उस की पत्नी से कितनी अच्छी हैं, ये सभी बातें आप की अच्छाई दर्शाती हैं. इन बातों से यह निष्कर्ष न निकालें कि वह आप के प्रति कितना प्रतिबद्ध है. केवल बातों से कुछ नहीं होता. यदि वह सच में आप को चाहता है तो वह अपनी पत्नी को छोड़ कर आप के साथ कानूनन विवाह करेगा.

छिपाना कठिन और दुखद भी : यह दुख वही समझ सकता है जिसे प्यारभरे रिश्ते में होते  हुए भी अपनी खुशी, अपना साथ सब की आंखों से छिपाना पड़ता है. न खुल कर घूम सकते हैं, न एकदूसरे के साथ की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सकते हैं. इस का सीधा असर आप के आत्मसम्मान पर पड़ता है.

उस के अक्स का आईना : जिस रिश्ते को वह पसंद नहीं करता उसे खत्म करने के बजाय, वह आप के साथ अफेयर चला रहा है. इस से पता चलता है कि भविष्य में जबजब उस पर कोई मुसीबत आ पड़ेगी तो वह उस से मुकाबला करने के बजाय आंख चुराएगा.

उस के दोनों हाथों में लड्डू : समाज में घूमते समय उस की एक पत्नी है, और रहीसही कसर पूरी करने के लिए आप. हो गए न उस के दोनों हाथों में लड्डू, जबकि आप के पास कुछ भी नहीं.

बेवफा से प्यार : आज नहीं तो कल आप के अपने जेहन में यह बात आएगी कि जो अपनी धर्मपत्नी का सगा नहीं हो सका वह आप का कितना साथ निभाएगा? जो इंसान अपनी पत्नी से झूठ बोल कर आप से रिश्ता कायम किए हुए है उस पर विश्वास डोलना स्वाभाविक है.

आप भी बराबर की दोषी : मानें या न मानें पर उस के इस झूठ में, इस फरेब में आप भी बराबर की जिम्मेदार हैं. उस की पत्नी या बच्चे उस की गृहस्थी टूटने का दोषी आप को अधिक मानेंगे. और यह भी हो सकता है कि कभी पकड़े जाने पर वे सारा दोष आप के माथे पर मढ़ दें.

समय नहीं ठहरता : उसे यह तौरतरीका जंचता है तो जाहिर है उसे कोई जल्दी नहीं होगी. ऐसा न हो कि जब तक आप यह बात समझें कि इस रिश्ते का कोई भविष्य नहीं, तब तक आप के जीवन के अनमोल वर्ष आप के हाथ से फिसल जाएं.

परिवार का रोल

ऐसी बातें एक लड़की न तो पिता से बांट सकती है और न ही भाई से. मां उम्र में बड़ी और विचारों में पिछली पीढ़ी की होती है. बहन ब्याह कर दूजे घर की हो जाती है. इसलिए भाभी ऐसे मामलों में सही अर्थ में सहायक हो सकती हैं. देहरादून के एक विश्वविद्यालय में कार्यरत दिशा, वहीं के एक अध्यापक, जोकि एक बेटे का पिता था, से संबंध बना बैठी. दोनों की कुछ गलतियों के कारण यह बात सारे कैंपस में फैल गई. दिशा को संभाला उस की भाभी ने, उन्होंने हर कदम पर उस की सहायता की. यहां तक कि भावावेश में हुई गलती के परिणामवश जब दिशा गर्भवती हो गई तो गुपचुप तरीके से भाभी ने साथ जा कर उस का गर्भपात करवाया. ऐसी स्थिति में दिशा ने उस अध्यापक का रवैया भी देखपरख लिया. उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. भाभी ने घर में किसी को भी इस बारे में हवा नहीं लगने दी. विश्वविद्यालय में दिशा की सहेलियों से मिल कर भाभी ने उन्हें भी दिशा का साथ देने की प्रार्थना की. भाभी की सूझबूझ ने दिशा को गलत राह पर भटकने से बचा लिया और उसे अवसाद का शिकार भी नहीं होने दिया.

लेकिन हर परिवार में ऐसी भाभी हो जो समय पर हाथ थाम आगे बढ़ चले, यह जरूरी नहीं. भाभियों के भी कई प्रकार होते हैं. इंसानों की अलगअलग फितरत की तरह भाभियां भी भिन्नभिन्न तरीके से ऐसी स्थिति में प्रतिक्रिया कर सकती हैं.

भाभी नंबर 1 : दिशा की भाभी की तरह, यह वह भाभी है जो आवश्यकता पड़ने पर साथ निभाएगी, राज को राज रखेगी, यहां तक कि अपने पति को भी नहीं बताएगी. ऐसी भाभी अपनी ननद को अपनी बहन की तरह मान कर, उस की इज्जत और खुशी, दोनों बचाएगी.

भाभी नंबर 2 : बड़ा इतराती थी न आप मम्मीजी, कि आप की बेटी कितनी सुशील है, संस्कारी है, कमाती है…हुंह, देख ले इस की करतूत. नाक कटवा के रख दी सारे समाज में. अब मैं क्या मुंह ले कर जाऊंगी बाहर – अपने मायके, अपनी सहेलियों में. अब तो इस की सूरत देखना भी मुश्किल हो रहा है मेरे लिए, एक रूप ऐसा भी हो सकता है भाभी का.

भाभी नंबर 3 : जो गलती हुई सो हुई, अब एक परिवार की तरह बंधे रहते हुए आगे की सुध लो – एक विचार यह भी हो सकता है. हो सकता है कि दोनों सच्चा प्यार करते हों और उम्रभर साथ रहना चाहते हों. अपने पति को बात की गहराई समझाते हुए, बढ़ती उम्र में कुंआरी ननद की मनोस्थिति, उस की इच्छा जानना और फिर उस इच्छा में उस का साथ देना.

भाभी मां समान

भाभी को ‘मां समान’ कहा जाता है – मां जैसी समझदारी और मां के आंचल सी ओट. पर मां जैसी जरूरत से ज्यादा भावनात्मकता नहीं. भावनात्मक संबल दिखाते हुए एक भाभी पूरे परिवार को संभाल सकती है. आखिर वह परिवार की बहू है जिसे परिवार को पिछली पीढ़ी से विरासत में ले कर स्वयं संभालना है और अगली पीढ़ी को सौंपना है. बस, समझदारी चाहिए तो इतनी कि सब से पहले वह यह निश्चित करे कि ननद के इस रिश्ते में कितनी सचाई है तथा दोनों पक्षों की इच्छा क्या है. वयस्कों को पूर्ण आजादी है अपनी मरजी करने की लेकिन किसी के साथ कोई धोखा नहीं होना चाहिए वरना स्थिति दुखद बन जाती है.

अफेयर के दौरान यह मानना कि इस के परिणाम देखे जाएंगे, एक लापरवाह सोच है. ऐसा नहीं हो सकता कि अफेयर और अपनी जिंदगी को 2 अलगअलग पालों में रखा जा सके. यदि दिल टूटेगा तो दुनिया भी टूटेगी, ढहेगी, खालीपन में भर जाएगी. इसीलिए स्पष्टता आवश्यक है. कहीं ऊहापोह में ही जिंदगी का महत्त्वपूर्ण समय न निकल जाए. क्योंकि नतीजों से तो हर हाल में स्वयं को ही निबटना होगा.