सरिता विशेष

आप की लौटरी निकल आई है. आप को एक अनजान दक्षिण अमेरिकी अमीर ने अपना वारिस बना दिया है. आप को हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने डाक्टरेट की मानद उपाधि देने का फैसला किया है. आप विश्वविख्यात संस्था द्वारा ब्रैंड ऐंबैसेडर नियुक्त किए गए हैं. इस तरह के मोबाइल मैसेज और ईमेल व्यक्तियों को मिलते हैं. जो जरा समझदार हैं वे तुरंत उन्हें डिलीट कर देते हैं पर उन की संख्या कम नहीं जो फंस जाते हैं.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एक प्रोफैसर इस तरह के ईमेल के चक्कर में फंस गए कि उन्हें एक बेऔलाद जरमन ने अपना वारिस चुना है. बस, उन्हें अपना अकाउंट नंबर देना है, पासपोर्ट की कौपी देनी है, 2-4 दस्तावेज देने हैं और पैसा उन्हें मिल जाएगा. अब जो लोग चमत्कारों में विश्वास करते हैं वे इस अवसर को कैसे हाथ से जाने दें. वे हां करते हैं तो पता चलता है कि उन्हें दूसरे किसी देश में एक वकील करना होगा जो कुछ सौ डौलर की फीस लेगा.

फीस दे दी गई तो नई मांग आ जाती है कि उन का लाखों डौलर का भुगतान तैयार है पर बैंक को पैसे संभालने के खर्च देने होंगे जो किसी अकाउंट नंबर में डालने हैं. इस प्रोफैसर ने 25 लाख रुपए इसी आशा में दे दिए कि वह तो करोड़ों का मालिक बनने वाला है. अंत में पता चला कि वह तो ठगा गया. इस मामले में किसी ने उस से मिलने की कोशिश कर ली तो एक पकड़ा गया वरना ज्यादातर मामलों में कोई पकड़ा भी नहीं जाता.

गुप्त खजाने की खोज की कहानियों के आधार पर यहां भी चालाक लोग पूजापाठ और यहां तक कि मासूम बच्चों की बलि तक करा डालते हैं. जो इस बात में विश्वास करते हैं कि पैसा टपकता है, कमाया नहीं जाता, वे आसानी से फंस जाते हैं.

चमत्कारों से कमाई नहीं होती, यह सिद्धांत हरेक को मालूम होना चाहिए. पैसा मेहनत का हो तो ही फलता है. हराम की या चोरी की कमाई कुछ लोग ही पचा सकते हैं, शरीफ तो बिलकुल नहीं. इसलिए शरीफों को इन चक्करों में पड़ने पर भारी नुकसान ही होता है.