ऐक्ट्रैस तनुश्री दत्ता ने फिल्म ‘होर्न ओके प्लीज’ के सैट पर नाना पाटेकर की बदतमीजी और सैक्सुअल हैरेसमैंट को ले कर वर्षों बाद सवाल उठाया है. कुछ हुआ हो या न हो, बौलीवुड के सैटों पर सनसनी फैल गई है कि मेल ऐक्टर अपनी धौंस फीमेल ऐक्ट्रैसों पर जमाएंगे तो कब उन्हें जवाब देना पड़ जाएगा, इस का पता नहीं.

सोशल मीडिया ने हर महिला को अब यह अधिकार या अवसर दे दिया है कि वह किसी के खिलाफ कभी की भी शिकायत कर के, गड़े मुरदे उखाड़ कर, किसी भी दंभी, गुस्सैल और बड़बोले पुरुष की बोलती बंद कर दे. अब यह पुरुष पर निर्भर करता है कि वह कितना, कैसे झेले. इस सारी कवायद के पीछे सोच यह है कि जब एक जानीमानी महिला अपने चरित्र को दांव पर लगा रही है तो कुछ तो बात होगी ही.

कोई भी लड़की बिना कारण अपना चरित्र उघड़वाने को तैयार न होगी. उस के साथ कुछ हुआ होगा तभी वह महीनों या बरसों बाद भी अपने पात्र के चिथड़े उधेड़ने को इसलिए तैयार है ताकि दोषी को सजा न भी मिले तो कम से कम उसे कठघरे में खड़ा तो किया जा सके.

लड़कियों को कई क्षेत्रों में आज भी कमजोर व असहाय समझा जाता है. बहुत से पुरुष उन की कमजोरी का नाजायज फायदा उठाने की कोशिश करते हैं. जब से सैक्स संबंध वर्जित नहीं रह गए हैं और जो लड़कियां खुल्लमखुल्ला सिगरेट व शराब पीती हैं, तो समझा यह जाता है कि वे हर बात के लिए सहमति दे देंगी, यहां तक कि बिस्तर पर जाने को भी. लड़कियां यह अपनी मरजी से कर रही हैं या जबरन, यह कहना बड़ा कठिन है, कम से कम उस समय जब पुरुष साथी को अपने पर जरूरत से ज्यादा कौन्फिडैंस हो.

यही बाद में कैक्टस बन जाता है और एक दिन कैंसर की तरह फट पड़ता है. लड़केलड़कियां जब काम पर आएं तो वे बराबर की हैसियत से आएं और सैक्स का, स्मार्टनैस का या लस्ट का लालच छोड़ आएं. वर्कप्लेस में लड़केलड़कियां सहयोगियों की तरह काम करें, अपोजिट सैक्स की तरह नहीं. अगर प्रेमी ढूंढ़ना है तो वर्कप्लेस से बाहर कहीं ढूंढ़ें जहां वे मिलें तो उन में से कोई अधिकारी की हैसियत में न हो. आजकल इस के अवसर कम नहीं हैं. पार्टियां हैं, रैस्तरां हैं, बसें हैं, कालेज हैं, डेटिंग ऐप्स हैं, व्हाट्सऐप ग्रुप हैं, इन सब से जो चाहे वह रास्ता चुनें.

वर्कप्लेस में जहां एक के पास कुछ ज्यादा अधिकार होते हैं, किसी भी तरह का उस से लगाव खतरनाक है क्योंकि वह कब परेशान करे, कहा नहीं जा सकता. हैसियत और अधिकार रखने वाले हर शख्स को अपने पर नियंत्रण रखना होगा क्योंकि अब महिलाएं चुप नहीं रहतीं या कहिए कि उन की चुप्पी को ग्रांटेड नहीं लिया जा सकता.