सरिता विशेष

‘‘सरकार लोगों की मनमानी पर अंकुश लगाने के बजाय आंखें मूंदे हुए है. नौकरशाह और राजनीतिक लोग अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हाथ मिला कर काम कर रहे हैं. देश में खासतौर पर उत्तर प्रदेश को विदेशियों ने हजारों सालों तक लूटा और आजादी के बाद अलग तरीके से यह लूट जारी है.’’

ये वाक्य उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल के हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा एक उद्योगपति को दिए गए प्लौट के आवंटन को रद्द करने को अवैध ठहराते हुए कहे. असल में देश में आज नागरिक जो आतंक और अन्याय सह रहे हैं वे तो विदेशियों के शासन में भी नहीं सहने पड़े. लुटेरों को छोड़ दें तो विदेशी शासन हमारे अपने शासन से हमेशा ज्यादा अच्छे रहे हैं.

आज पटवारी से ले कर केंद्रीय मंत्री तक सब आम आदमी की लूट पर मौज कर रहे हैं. उन्होंने नियमों, उपनियमों, शासनादेशों और अपने खुद के निर्णयों का ऐसा जाल बुन रखा है कि हर नागरिक जबतक लुटपिट नहीं जाता, वह जी नहीं सकता.

इस देश से गरीबी अगर कम नहीं हो रही है तो इसलिए कि सरकारी अमला और उस के सहारे पलने वाला पूंजीपति वर्ग जनता की संपत्ति को समेटे जा रहा है और आम आदमी योग्यता व क्षमता होने के बावजूद असहाय है. वह अपनी मेहनत का ज्यादा समय सरकारी गलियारों में बिताता है. सरकार, सरकारी नेता, सरकारी अफसर, सरकारी अदालतें आज किसी के प्रति जिम्मेदार नहीं हैं. वे नियम, कानून बनाते हैं पर उद्देश्य होता है जनता को लूटना.

अरबों के जो बेईमानी के मामले दिख रहे हैं और रातोंरात जो अरबपति बनते दिख रहे हैं, वे इस सिस्टम की देन हैं जिस का जिक्र न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने अपने फैसले में किया. पर क्या किसी की सेहत पर कोई असर पड़ता है? अब सरकारी मशीनरी इतनी दंभी और बेफिक्र हो गई है कि वह हर तरह की आलोचना को कुत्तों का भूंकना समझ कर उसे पूरी तरह अनदेखा कर देती है.