दुनिया भर में वेश्यावृत्ति में औरतों को देह परोस कर पैसा पाने से ज्यादा पैसा वेश्याओं का लालच दे कर पुरुषों से लूटा जाता है. दिल्ली में एक ऐसा गिरोह पकड़ा गया है, जो मसाजपार्लर चलाने के नाम पर ठगी करता था. वह गिरोह मसाज का बहाना बना कर ग्राहकों को फंसाता था. जब आदमी कपड़े उतार चुका होता तो उसी गिरोह के लोग पुलिस की वरदी में पहुंच जाते और उसे लूट लेते. इस काम में औरतें पूरी तरह शामिल रहती हैं और वे ही वे कीड़ा होती हैं, जिन से मछली फंस ही जाती है. ऐसा कमोबेश सारे देशों और सारे शहरों में होता है. औरतें 1-2 बार तो नानुकुर करती हैं पर फिर साथ देने लगती हैं, क्योंकि जीने के लिए पैसा चाहिए. फिर चाहे वह देह परोस कर मिले या आकर्षित कर के.

औरतों के प्रति यह उत्सुकता घरों पर बहुत भारी पड़ती है. पत्नियों को जब पता चलता है कि पति इस तरह लुट कर आया है, तो उन को मालूम नहीं होता कि वे हमदर्दी दिखाएं या गुस्सा करें. पति का इस तरह का कार्य पत्नी के स्वाभिमान के खिलाफ होता है और वह इस बात को किसी से शेयर भी नहीं कर सकती. परिणामस्वरूप पतिपत्नी के बीच एक दरार पड़ जाती है. वेश्यावृत्ति के मामलों में आमतौर पर हमदर्दी वेश्याओं के प्रति दर्शाई जाती है कि उन्हें देह बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है. वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियों का अपहरण भी होता है. वे आमतौर पर बीमार रहती हैं और जल्दी बूढ़ी हो जाती हैं. उन के उद्धार के लिए बहुत रोना रोया जाता है पर उन औरतों का क्या जिन के पति या बेटे इस तरह की औरतों के पास जा कर पैसा बरबाद कर के आते हैं? पुरुषों में दूसरी औरत के लिए स्वाभाविक प्राकृतिक चाह होती है, पर हमेशा से यह दूसरी औरत पहली वाली के लिए खतरा बनी रही है. यहां मामला सिर्फ सौतिया ढाह का नहीं है, घर की पूरी व्यवस्था का है. यदि पति को किसी से प्रेम हो जाए तो पत्नी फिर भी तसल्ली दे सकती है कि तलाक तो लिया जा सकता है. बाजारू औरतों के चक्कर में लूटे गए पति के बारे में किस से कैसी शिकायत करे पत्नी या मां?

कानून और पुलिस इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कर सकते. यह मामला तो सामाजिक है और अफसोस यह है कि समाज में विचारक कम हैं तोड़फोड़ करने वाले, धमकी देने वाले, खिल्ली उड़ाने वाले या मजा लेने वाले ज्यादा. यह व्यापार चल रहा ही इसलिए है कि समाज की इस लूट को बंद कराने में कोई रुचि नहीं है. भले इस की वजह से सारी पत्नियां या मांएं परेशान रहती हों.