तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने गारंटी दी है कि तेलंगाना अब फलेगा फूलेगा. अब वहां सोने की वर्षा होगी. सूखा, बाढ़, भूख, किसानों की आत्महत्याएं सब खत्म हो जाएंगी. स्वयं इंद्र, विष्णु, शिव, राम, कृष्ण राजपाट चलाएंगे और रामराज्य नहीं, स्वर्ग ही उतर आएगा. उन्होंने यह भी बता दिया है कि राज्य के हर घर में चमक के लिए काम करने की जरूरत नहीं है. किसान खेतों में न जाएं, मजदूर फावड़ा न उठाएं, कारीगर फैक्टरियों में न जाएं, औरतें रसोइयों में न जाएं. बस, यज्ञहवन कराएं.

उन्होंने चंडी देवी को खुश करने के लिए 22 दिसंबर को हैदराबाद में 1500 श्रेष्ठ पुजारियों को बुला कर महान यज्ञ कराया. के चंद्रशेखर राव ने भगवा कपड़े पहने, अपनी पत्नी शोभा को भी भगवा साड़ी पहनवाई, राज्य के राज्यपाल भी भगवा कपड़ों में आए, तेलंगाना राज्य समिति पार्टी पूरे सबल सहित भगवाई या पीले कपड़ों में मौजूद थी. वीआईपीयों को खास जगह दी गई. बाकी लोग बस या कार पार्क करने के बाद मील 2 मील पैदल नंगे पांव चल कर यज्ञपंडाल तक पहुंचे.

जो सही जगह पहुंचीं उन भक्तिनों को कुमकुम की डब्बी, साड़ी, लड्डू मिले. जो पैसे चढ़ाए उस से प्रसादम की गिनती करना तो महापाप होगा. भक्तों और भक्तिनों ने खूब दिल खोल कर तेलंगाना की प्रगति के लिए दान दिया.

आंध्र प्रदेश सूखे से पीडि़त है पर यह पक्का है कि इस यज्ञ के बाद जम कर बारिश होगी. चंडी देवी इंद्र से कहेंगी कि चंद्रशेखर राव पर प्रसन्न हों और उन्हें लंबी चीफमिनिस्ट्री दें, साथ ही राज्य की जनता का घर भर दें.

जो लाखों लोग वहां आए वे ही प्रसन्न नहीं हुए, सभी ऋषिमुनि, पंडे, पुजारी, स्वामी प्रसन्न थे. सब के लिए बढि़या व्यवस्था थी. आखिर वे तेलंगाना के लिए अपने भगवान की अर्चना कर धनधान्य की वर्षा कराने वाले थे. मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया कि राज्य के हर घर को इस तरह के यज्ञ कराने चाहिए और नौकरी, मजदूरी, किसानी छोड़ देनी चाहिए. अगर चंडी देवी खुश तो सबकुछ बिना करेकराए मिल जाएगा. आखिर इन्हीं यज्ञों के कारण तो आंध्र प्रदेश का विभाजन हो सका और तेलंगाना राज्य बना जिस के चंद्रशेखर राव मुख्यमंत्री बने थे.

यह वही हैदराबाद है जिसे साइबराबाद कहा जा रहा था. पर बजाय कंप्यूटरों, विज्ञान, तकनीक के, यहां के मुख्यमंत्री तो मूर्खमंत्र पढ़वा रहे हैं जिस का उद्देश्य सदियों पुरानी पोंगापंथी को फिर से 21वीं सदी में थोपना है. सरकार की मशीनरी को इस प्रकार के नाटकों में लगाना गलत ही नहीं, अपराध है. जनता को यह संदेश देना कि प्रगति मेहनत और प्रतिभा से नहीं, मंत्र पढ़वाने और अधपढ़े रट्टूपीर पंडों के अनसुने से श्लोकों के माइकों पर चीखने से आती है, जनता के प्रति अपराध है.

आंध्र प्रदेश वह राज्य है जो हैदराबाद की कंप्यूटर सिटी के लिए जितना जाना जाता है उतना ही किसानों की आत्महत्याओं के लिए भी. यही वह राज्य है जहां माओवादी पनपते हैं, जिन्होंने आंध्र प्रदेश से ले कर असम तक पैर फैला रखे हैं. यह वही राज्य है जहां 1947 तक मुसलमानों का राज चला जबकि बहुमत हमेशा हिंदुओं का रहा और ऊंची जातियों के विशाल मंदिर चारों ओर बिखरे हैं. इस राज्य का मुखिया यह गलत संदेश दे कि आज भी शासन विधानसभा से नहीं, यज्ञसभा से होगा, देश के संविधान की आत्मा से खिलवाड़ है.

शायद स्वयं चंडी देवी भी प्रसन्न नहीं हुईं क्योंकि उक्त यज्ञशाला में आग लग गई. पंडाल का बड़ा हिस्सा जल कर नष्ट हो गया. वाह, इसे कहते हैं तुरंत डिलीवरी, पिज्जा हट के गरमागरम पिज्जा की तरह. स्वयं अग्निदेवता पधार कर यज्ञपंडाल को अपने साथ ले गए. क्या संदेश दिया इस सब ने आम गृहिणी को?