सरिता विशेष

हमारे धर्मग्रंथों में बारबार कथाएं आती हैं कि जब दैत्यों, दस्युओं का जोर पकड़ने लगता था, ऋषिमुनि तत्कालीन राजा के आगे जा कर गुहार लगाते थे और राजा बामन अवतार धारण कर या खंभे में छिप कर नरसिंह अवतार बन कर या मोहिनी अवतार बन कर छल, कपट, बेईमानी, झूठ, धोखे से देवताओं व ऋषियों का उद्धार करता था. राम, कृष्ण समेत इन सब अवतारों की गाथाएं पढ़ लें, आप को साफ दिखेगा कि उन्होंने छल से देवताओं का आर्य राज कैसे पुन: स्थापित किया.

यही आज हो रहा है. तब की कहानियां भी आज बच्चों को स्कूलों में पढ़ाई जा रही हैं, चित्रकथाएं बन रही हैं, टीवी धारावाहिक बन रहे हैं, नृत्यनाटिकाएं बन रही हैं, रामलीलाएं, कृष्णलीलाएं हो रही हैं, पुराणों का पाठ हो रहा है. देश की राजनीति में ऐसा 1947 से हो रहा है, आज कुछ ज्यादा ही हो रहा है.

केंद्रीय जांच ब्यूरो का दिल्ली सरकार के सचिवालय पर छापा कुछ ऐसा ही था. एक तरह से यह जताता है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो के अनुसार रिश्वत का पैसा, उस के दस्तावेज, कागज की सरकारी फाइलों में रखे जाते हैं और तभी बिना बताए उन्हें परखने का हक उस के पास है. मगर सीबीआई की सोच ऐसी है तो जनता के लिए बड़े राहत की बात है कि वह अब इस सरकारी कदम के आधार पर कह सकती है कि सरकार चोर, उचक्कों, डाकुओं, बेईमानों की तरह ही होती है और सरकारी दफ्तर डाकू मान सिंह के अड्डे की तरह हैं जिन पर छापा मारो तो बहुत कुछ मिलेगा. अगर दिल्ली सरकार के दफ्तर ऐसे हैं तो नौर्थ ब्लौक और साउथ ब्लौक व राजपथ के दोनों ओर बने विशाल भवन क्यों न ऐसे होंगे. आखिर उन सभी में भी तो वही आईएएस सेवा के ही अफसर तो हैं.

सीबीआई ने प्रमाण दे दिया है कि बेईमान उद्योगपतियों की तरह नौकरशाही भी बेईमान ही है और मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, शायद राष्ट्रपति भी, इसी गिनती में आएंगे. नेताओं को अब बेईमान उसी तरह कह सकते हैं जैसे धन्ना सेठों को कहा जाता है. सुब्रतो राय, जो 2 साल से जेल में है, और मंत्रियों व उन के अफसरों में कोई फर्क नहीं है. अरविंद केजरीवाल ने यह साबित करवा दिया कि आज की केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो यह मानते हैं कि कोई भी बेईमानी से ऊपर नहीं है और जनता को किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए. अब यह देखना बाकी रह गया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच के लिए कौन सा ब्यूरो बनेगा.