सरिता विशेष

बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई में वैश्विक बाजारों तथा देश के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े में गिरावट व महंगाई के आंकड़े में 22 माह में सर्वाधिक तेजी रहने के कारण दबाव बना रहा और अगस्त के तीसरे सप्ताह में बाजार की 3 सप्ताह की तेजी पर ब्रेक लगा. इसी बीच, सरकार ने रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर तथा बैंक के मौद्रिक विभाग के प्रभारी उर्जित पटेल को केंद्रीय बैंक का अगला गवर्नर बनाने की घोषणा की तो इस से बाजार में ‘ऊर्जा’ का माहौल बना और निवेशकों में उत्साह

देखने को मिला. सूचकांक बढ़ कर बंद हुआ हालांकि इस दौरान रुपए में कोई सुधार देखने को नहीं मिला. उर्जित पटेल के नाम की घोषणा के बाद बाजार को ऊर्जा मिली और सूचकांक  28 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर पर टिका रहा. इस से करीब 3 सप्ताह पहले बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई थी और उस के बाद सूचकांक लगभग दबाव में ही रहा. इसी दौरान दबाव में चल रहे निवेशकों में उत्साह भरने के लिए अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने और सार्वजनिक खर्च को ले कर सरकार द्वारा उपाय करने संबंधी खबरों ने बाजार पर बने दबाव को कम करने का प्रयास किया. हालांकि वैश्विक माहौल तथा कई कारणों की वजह से बाजार में दबाव की स्थिति पूरी तरह से दूर नहीं हो सकी.