सरिता विशेष

देश में एटीएम आधारित बैंकिंग कारोबार परवान चढ़ रहा है. एटीएम से निकासी की दर लगातार बढ़ रही है. एटीएम से लोग किस कदर अपना काम चला रहे हैं, इस का प्रमाण नोटबंदी के दौरान एटीएम पर लगी लोगों की लंबी कतारें रही हैं. महानगरों में किस एटीएम पर पैसा आया है, यह सूचना आग की तरह फैलती थी और देखते ही देखते एटीएम के बाहर लोगों की लंबी कतारें लग जाती थीं.

सरकार ने एटीएम की निकासी पर कुछ शुल्क बढ़ा दिए हैं और नई शर्त लगा दी है. इस के बावजूद लोगों की एटीएम से निकासी का उत्साह कम नहीं हुआ है. यह आम आदमी के लिए बड़ी सुविधा है. बैंकों को इस से बड़ी राहत मिली है. इसलिए वे इस सुविधा पर शुल्क बढ़ा कर कमाई भी करने लगे हैं और एटीएम की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है.

पिछले वर्ष मार्च से इस मार्च तक देश में 10 हजार से ज्यादा नए एटीएम लगाए गए हैं. एक आंकड़े के अनुसार, मार्च 2016 में देश में कुल एटीएम की संख्या 2 लाख 12 हजार 61 थी जो इस साल बढ़ कर 2लाख 22 हजार 475 हो चुकी है. पिछले वर्ष दिसंबर तक देश में एटीएम की संख्या बढ़ कर 2 लाख 19हजार 793 तक पहुंच चुकी थी. बैंकों ने उस के बाद रफ्तार पकड़ी है.

दरअसल, एटीएम कार्ड आम जरूरत की चीज बन गई है. लोगों के जेब में नकदी के बजाय एटीएम कार्ड होता है. चूंकि एटीएम हर जगह उपलब्ध हैं, इसलिए लोग नकदी रखने का जोखिम नहीं उठाते और जहां जरूरत पड़ती है एटीएम का इस्तेमाल करते हैं. बैंकर एटीएम की संख्या बढ़ाते जा रहे हैं जो डिजिटल इंडिया के लिए महत्त्वपूर्ण पड़ाव बन रहा है.