प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल्दबाजी और बिना तैयारी के नोटबंदी की घोषणा की लेकिन हकीकत यह है कि इस की तैयारी एक साल से पहले से चल रही थी. विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल्दबाजी और बिना तैयारी के नोटबंदी की घोषणा की लेकिन हकीकत यह है कि इस की तैयारी एक साल से पहले से चल रही थी. यह अत्यंत गोपनीय ढंग से चल रही थी. इस की तैयारी राजस्व सचिव हंसमुख अधिया और 5 अन्य लोग प्रधानमंत्री कार्यालय में एक कमरे में बैठ कर कर रहे थे, वहीं रणनीति बनाई गई कि किस तरह से इस योजना को अंजाम देना है.

टीम के सदस्यों को पहले गोपनीयता की शपथ दिलाई गई. उन पर कोई संदेह नहीं करे, इस संबंध में उन्हें अत्यधिक सावधानी बरतने को कहा गया. यह टीम तय कर रही थी कि किस तरह से नए नोटों को छापा जाना है, नोटबंदी की घोषणा के बाद नए नोटों को कैसे बैंकों तक पहुंचाना है, जन सामान्य को पुराने नोट बदलने के लिए किस तरह की व्यवस्था की जानी है आदि. अत्यधिक सावधानी बरतने के बावजूद 2,000 रुपए के नए नोट के बाजार में आने की खबर मई में आ गई थी और अगस्त में इस की मंजूरी मिलने की मीडिया ने खबर दे दी थी.

मीडिया में खबरें आने के बाद अक्तूबर से 2,000 रुपए के नोट की छपाई शुरू हो गई थी. तब तक यह अनुमान लगाना कठिन था कि सरकार नोटबंदी की घोषणा करने जा रही है. नवंबर में दल के सदस्यों से सलाह करने के बाद 18 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा करने की तारीख तय की गई लेकिन यह आशंका बढ़ गई थी कि नोटबंदी की योजना लीक हो सकती है, इसलिए 10 दिन पहले यानी 8 नवंबर को रात 8 बजे प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में अचानक नोटबंदी की घोषणा कर दी.

योजना में सीमित लोगों के ही शामिल होने की वजह से कई खामियां रह गईं. इसलिए घोषणा के बाद नई नई दिक्कतें सामने आती रहीं और उन से निबटने के लिए समय समय पर नियम बदलने पड़े.

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