वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) विधेयक के संसद में पारित होने के बाद बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई की प्रतिक्रिया सधी हुई रही. ‘एक देश एक कर’ व्यवस्था को ले कर जीएसटी पर सरकार की तरफ से जो माहौल तैयार किया गया, निवेशक उस से प्रभावित नहीं हुए और उन्होंने बाजार में सधे हुए अंदाज में कारोबार किया. इस का मतलब यह हुआ कि जीएसटी को निवेशक अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए गंभीर व्यवस्था मानते हैं और इस पर उन्होंने सामान्य रुख इख्तियार करना उचित नहीं समझा. इसी बीच, बैंक औफ इंगलैंड ने ब्याज दरों में कटौती और अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए अप्रत्याशित उपाय किए जिस के कारण यूरोपीय और एशियाई बाजारों में जम कर उबाल आया. इस का असर बीएसई पर भी देखने को मिला और सूचकांक फिर 28,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया. इस बीच, सरकार ने अगले 5 सालों के लिए 4 प्रतिशत मूल्यवृद्धि का लक्ष्य निर्धारित करने के वास्ते एक अधिसूचना जारी की है. इसी के आधार पर नई ब्याज दर निर्धारण करने वाला पैनल मौद्रिक नीति संबंधी फैसले लेगा.

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