सरिता विशेष

करीब आधा माह बीत गया है, सराफा कारोबारी पूरे देश में हडताल पर चल रहे है. इनकी दुकाने बंद और कारोबार ठप्प पड गया है. शादी विवाह के इस सीजन में सोने चांदी के जेवरों की दुकाने बंद होने से आम जनता भी परेशान है. केन्द्र की सरकार इनकी बात सुनने और समस्या का समाधान निकालने को तैयार नहीं है. ऐसे में पूरे देश के सराफा कारोबारी देश की राजधनी दिल्ली तक अपना आन्दोलन लेकर पहुंच गये है. सराफा कारोबारियों को शिकायत है कि सभी सोने के जेवरों पर 1 प्रतिशत एक्साइज डयूटी लागू की गई है. सोने पर आयात शुल्क 2 प्रतिशत से बढाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है. हर खरीद पर आपको पैन कार्ड दिखाना होगा. हर खरीद को अपने इनकम टैक्स रिर्टन में दिखाना होगा. इसमें 2 लाख से अधिक कीमत का सोना और सोने के जेवर पर 1 प्रतिशत को अतिरिक्त टैक्स देना होगा. इस तरह से हर 10 ग्राम जेवर की खरीददारी पर 25 सौ रूपये टैक्स देना होगा. इसके अलावा ग्राहक जो पुराना देगा उस पर हर 10 ग्राम पर 12 सौ रूपये का टैक्स सरकार को देना होगा. जेवर की रिपोरिंग की इंट्री सराफा को करनी होगी. उस पर भी टैक्स देना होगा.

सराफा कारोबारियों का कहना है कि इस तरह के अतिरिक्त टैक्स से लाखों कारीगरों के बेरोजगार होने की आशंका है. अपनी बात न सुने जाने से सराफा कारोबारियों ने देश के प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम एक पत्र लिखा है. इसमें लिखा है प्रिय मोदी जी, आपने सराफा कारोबारियों को परेशान और आत्महत्या करने के लिये मजबूर कर दिया है. या तो सराफा कारोबारी जाटों की तरह आंदोलन करे या मर जाये. आप कालाधन देश से निकालने के लिये जोर आजमाइश कर रहे है. हम बताते है कि कालाधन कैसे निकलेगा. 1- सबसे पहले सारे विधायकों और सांसदों के घर छापा डलवाये. इसमें भाजपा के विधायक और सांसद भी हो. वहां कालाधन मिलेगा. 2- मंदिरो में चढे सोने का आधा हिस्सा सरकार के पास जब्त करवाकर उसे बैंको में रखने के बजाय उससे विदेशी कर्ज चुकाये. 3- सभी नेताओ के विदेशी बैंको में खाते सीज कराये. जब भारत सरकार को रिजर्व में सोना रखने का अध्किार है तो आमलोगों को क्यो नहीं  जब जरूरत के समय बैंक में रखा पैसा काम नहीं आता तो यह जेवर ही काम आता है. जेटली जी आप भी अपना घर छानिये और देखिये कि आपने पलिसी ज्यादा ली है या सोना  

सराफा कारोबारी केन्द्र में सरकार चला रही भाजपा का पक्का वोटबैंक रहा है. अपनी ही सरकार के द्वारा छले जाने से वह न केवल नाराज है बल्कि जजबाती भी हो गया है. वह अपनी हर बात सरकार के बडे पदों पर बैठे लोगों तक पहुंचाने की हर जुगत में लगा है. शहरों में यह कारोबारी धरना प्रदर्शन, पुतला दहन जैसे तमाम कार्यक्रम कर चुके है. अब सराफा कारोबारियों को आम जनता का साथ भी मिलने लगा है. ऐसे में सरकार के लिये अपनी साख बचाना मुश्किल हो रहा है. सरकारी नौकरों के पीएफ मामले में यूटर्न मार चुकी सरकार यहां झुकने में शर्म महसूस कर रही है.