बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ ही अब सरकार का भी मानना है कि गांव में कारोबार बढ़ाने की प्रबल संभावनाएं हैं. इस से न सिर्फ गांव मजबूत होंगे बल्कि गांव में ही युवकों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और शहरों पर दबाव घटेगा. इस के लिए सरकार गांव में बीपीओ केंद्र खोलेगी. ये केंद्र 3 शिफ्टों में काम करेंगे और इन से करीब 48 हजार युवाओं को नौकरी के अवसर प्राप्त हो सकेंगे. संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद का कहना है कि इन केंद्रों की शुरुआत जल्द की जाएगी और इस के तहत बिहार में 44 तथा उत्तर प्रदेश में 84 केंद्र खोले जाएंगे. ये केंद्र मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गोरखपुर, देवरिया, इदुकी जैसे छोटेछोटे स्थानों पर खोले जाएंगे. इन केंद्रों पर इंदिरा आवास योजना तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के साथ ही केंद्र तथा राज्य सरकारों की आम जनता से जुड़ी योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी जाएगी. इस काम के लिए सूचना तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों को गांव में ही नौकरी मिल सकेगी और उन्हें आईटी शहर बेंगलुरु आदि शहरों में नहीं जाना पड़ेगा.

सरकार का यह प्रयास गांव को मजबूत बनाने की दिशा में उत्साहजनक है. उन में छोटे शहरों के उन युवाओं के लिए अवसर पैदा होंगे जो उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए शहरों में धक्के खा रहे हैं. साथ ही, गांव के लोगों को उन की भाषा में सरकारी योजनाओं की जानकारी मिल सकेगी. इन केंद्रों पर सरकारी योजनाओं का डाटा उपलब्ध रहेगा. सरकार किस तरह की योजनाएं चला रही है, इस का भी गांव के लोगों को आसानी से पता चल सकेगा. कई सरकारी योजनाएं हैं जिन की जानकारी लोगों को नहीं होती है. इन योजनाओं का ज्यादा प्रचार प्रसार भी नहीं होता है और इस वजह से योजनाओं के लिए आवंटित पैसा भी खर्च नहीं हो पाता है. बीपीओ केंद्रों पर इस तरह की सारी जानकारी उपलब्ध होगी. यह प्रयास अच्छा है लेकिन इन केंद्रों पर यदि सरकारी विभागों की तरह काम होगा तो उस का लाभ आम जनता को नहीं मिलेगा. सरकार को निजी क्षेत्रों के बीपीओ की तर्ज पर इन्हें विकसित करना होगा और सारी सूचनाएं उन्हें देनी होंगी.

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