त्वचा को खूबसूरत, कोमल और अनचाहे बालों से आजाद बनाने  के लिए वैक्सिंग से बेहतर कोई विकल्प नहीं. वैक्सिंग से न केवल अनचाहे बाल रिमूव होते हैं, वरन टैनिंग जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं. वैक्सिंग कराने के बाद सामान्यतः त्वचा कम से कम 2 सप्ताह तक मुलायम रहती है 1 जो बाल फिर से उगते हैं, वे भी बारीक और कोमल होते हैं. नियमित रूप से वैक्सिंग कराने से 3-4 सप्ताह तक बाल नहीं आते. समय के साथ बालों का विकास भी कम हो जाता है.

एल्प्स beauty क्लीनिक की डायरेक्टर भारती तनेजा बताती  हैं कि वैक्स कई तरह के होते हैं

1. सौफ्ट वैक्स यानि रेगुलर वैक्स: ये सब से ज्यादा कौमन और इस्तेमाल की जाने वाली वैक्स है. ये वैक्स शहद, ग्लूकोज या चीनी के घोल से तैयार की जाती है. हेयर रिमूव करने के साथसाथ ये टैनिंग को तो रिमूव करती ही है साथ ही स्किन को सौफ्ट और ग्लासी भी बनाती है.

2. चौकलेट वैक्सः इस वैक्स की मदद से स्किन पोर्स बड़े हो जाते हैं, जिस से बाल आसानी से निकल जाते हैं और ज्यादा दर्द भी नहीं होता. इस के अलावा चौकलेट के अंदर स्किन सूदिंग तत्त्व पाए जाते हं जो बौडी को रिलैक्स करते हैं. कोको पाउडर बेस्ड इस वैक्स से ग्रोथ पूरी तरह रिरमूव हो जाती है और स्किन सौफ्ट व स्मूथ नजर आती है. इस वैक्स को करवाने से रैशस या फिर रेड पैचेज पड़ जाने के आसान भी न के बराबर हो जाते हैं. ऐसे में ये वैक्स सेंसटिव स्किन के लिए भी अच्छी साबित होती है. इस के अलावा चौकलेट का अरोमा बहुत ही आकर्षक होता है जो आप को विशेष आनं की अनुभूति करवाता है.

3. एलोवेरा वैक्स: एलोवेरा के पल्प से बनी ये वैक्स आप की स्किन को नरिश करने के साथसाथ रीजेनुवेट भी करती है. ये वैक्स बौडी के सेंसटिव एरिया जैसे अंडरआर्म्स और बिकनी पार्ट के लिए काफी अच्छी होती है.

4. ब्राजीलियन वैक्स: ये भी हार्ड वैक्स का ही एक टाइप है जिसे विशेषतौर पर बिकनी एरिया के लिए ही बनाया गया है. इस प्रौसेस में अनचाहे बालों को सभी जगह जैसे आगे, साइड, पीछे और बीच में से रिमूव किया जाता है. वैक्सिंग के दर्द को कम करने के लिए इस वैक्स को जल्दी करना जरूरी होता है.

5. लिपोसाल्यूबल वैक्स: ये वैक्स आयल बेस्ड होती है. बालों की रूट पर तो इन की ग्रिप अच्छी होती ही है साथ ही ये स्किन पर भी डेलीकेट होती हैं. इस वैक्स को इस्तेमाल करने से पहले स्किन पर औयल लगाया जाता है और बालों को रिमूव करने के लिए छोटीछोटी स्ट्रिप्स यूज की जाती हैं. ये वैक्स बहुत गर्म भी हो जाए तो भी स्किन को कोई नुकसान नहीं होता है.

इन बातों का रखें ध्यान

स्किन लेजर सेंटर के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर मुनीष पॉल कहते हैं कि वैक्सिंग कराने से पहले और बाद में कुछ सावधानियां जरूरी हैं. वैक्सिंग कराते समय त्वचा जल सकती है, लाल हो सकती है, त्वचा का संक्रमण हो सकता है. जहां वैक्सिंग किया है वहां दर्द होना, त्वचा में जलन, त्वचा के रंग में बदलाव आना, फफोले पड़ जाना, त्वचा का टैक्सचर बदल जाना, खुजली होना जैसी समस्याएं भी हो जाती हैं.

वैक्सिंग के पहले

वैक्सिंग कराने से पहले इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है

वैक्सिंग करने वाले के हाथ बिलकुल साफ होने चाहिए.

जिस हिस्से की वैक्सिंग करना है वह भी पूरी तरह साफ होना चाहिए.

वैक्सिंग किसी अच्छे पार्लर में कराएं.

ध्यान रखें कि वैक्स और पट्टियां अच्छे ब्रांड की हों.

जब आप को वैक्सिंग करानी हो उस के एक दिन पहले स्क्रबिंग करें यह मृत त्वचा को बाहर निकाल देता है जो हेयर फालिकल्स को बंद कर देते हैं. जिस के कारण हेयर इनग्रोन की समस्या हो सकती है.

वैक्सिंग के बाद…

वैक्सिंग के बाद

वैक्सिंग कराने के तुरंत बाद त्वचा लाल हो सकती है और उस पर रैशेज दिखाई दे सकते हैं. ये कुछ घंटों बाद अपने आप ही गायब हो जाते हैं. यह सामान्यतया हिस्टामिन रिएक्शन के कारण होता है क्योंकि वैक्सिंग बालों को जड़ों से निकाल देता है. यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि उस क्षेत्र को साफ और बैक्टीरिया मुक्त रखा जाए.

वैक्सिंग कराने के 24 घंटे बाद तक धूप में न निकलें.

12 घंटे तक कोई सनबाथिंग नहीं.

24 घंटे तक क्लोरीन युक्त स्विमिंग पूल में स्विमिंग न करें.

स्पा और सोना बाथ भी न लें.

कोई भी खुशबू वाला क्रीम न लगाएं इस से जलन हो सकती है.

त्वचा पर बैक्टीरिया के विकास को रोकने के लिए टी ट्री युक्त उत्पाद लगाएं.

अगर वैक्सिंग के बाद त्वचा लाल हो गई हो तो आधी कटोरी वसा रहित दूध में आधी कटोरी ठंडा पानी मिलाएं. इस में पेपर टावेल भिगोएं और इसे त्वचा पर रखें और कुछकुछ घंटों में तब तक दोहराते रहें जब तक आराम न मिले. दूध में पाया जाने वाला लैक्टिक एसिड त्वचा को आराम पहुंचाता है.

गूमड़ और इनग्रोन हेयर ग्रोथ को रोकने के लिए वैक्स किए हुए क्षेत्र पर तुरंत बर्फ लगाएं, जिस से रोम छिद्र बंद हो जाएंगे और बैक्टीरिया का प्रवेश रुक जाएगा. कुछ देर बाद वैक्स किए हुए क्षेत्र को सैलिसिलिक एसिड युक्त क्लींजर से धो लें.

अगर वैक्सिंग के बाद जलन हो रही है तो एलोवेरा युक्त क्रीम लगाएं, ध्यान रहे कि इस में अल्कोहल नहीं होना चाहिए.

जलन को कम करने के लिए बर्फ का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.

वैक्सिंग कराने के तुरंत बाद जिम न जाएं क्योंकि इस से आप की चिकनी त्वचा पर बैक्टीरिया फैलने का खतरा अधिक होता है.

वैक्सिंग कराने के कुछ घंटों बाद तक टाइट कपड़े न पहनें क्योंकि इस से त्वचा पर रगड़ लग सकती है और उस में जलन हो सकती है.

चेहरे पर वैक्सिंग

चेहरे पर अत्यधिक बाल होना कुछ महिलाओं के लिए बहुत बड़ी समस्या हो जाती है. कुछ पार्लर इस से छुटकारा पाने के लिए वैक्सिंग कराने की सलाह देते हैं. विशेषज्ञों का मानना हे कि चेहरे पर वैक्सिंग कराना नुकसानदायक हो सकता है. चेहरे की त्वचा बहुत मुलायम होती है इसलिए समय से पहले झुर्रियां पड़ सकती हैं. अगर बाल मोटे हैं तो लेजर हेयर रिमुवल सर्वश्रेष्ठ विकल्प है. आप ब्लीचिंग का विकल्प भी चुन सकते हैं. वैक्सीन से हेयर फालिकल्स को बहुत नुकसान पहुंचता है जिस से संक्रमण और सूजन हो सकती है. इस के कारण दाग भी पड़ सकते हैं जिन का उपचार करना कठिन है.

जरूरी सावधानियां

किसी भी बड़े समारोह से ठीक पहले वैक्सीन न कराएं क्योंकि आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि आप की त्वचा वैक्सीन के प्रति क्या प्रतिक्रिया देगी.

अगर आप वैक्सिंग कराते हैं तो बीचबीच में शेव न करें इस से बाल कड़े हो जाते हैं और वैक्सिंग करने में समस्या आती है.

जिन्हें त्वचा संबंधी कोई समस्या है जैसे एक्जिमा, कहीं से त्वचा कटी हुई है या घाव है उन्हें वैक्सीन से दूर रहना चाहिए.

वैक्सिंग के दौरान त्वचा कट सकती है और संक्रमण का खतरा हो सकता है इसलिए साफसफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है.

अगर वैक्सिंग कराने के 24 घंटे बाद तक दर्द, जलन हो रही हो या सूजन आ गई हो या विचित्र सी गंध आ रही हो तो तुरंत किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ को दिखाएं.

लेजर तकनीक से पाएं अनचाहे बालों से स्थायी छुटकारा

डॉक्टर मुनीष पॉल के मुताबिक अगर आप अपने चेहरे या शरीर के अनचाहे बालों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो वैक्सिंग या लेजर का विकल्प चुनें क्योंकि इन में त्वचा शेविंग की तुलना में अधिक समय तक मुलायम रहती है. लेजर से हमेशा के लिए बालों से छुटकारा मिल जाता है. जबकि अस्थायी विधियों में नियमित रूप से रखरखाव की आवश्यकता होती है.

लेजर के बाद कई लोगों में फिर से बालों का विकास होता है. लेकिन बालों के विकास का काल एक क्लाइंट से दूसरे क्लाइंट के लिए अलगअलग हो सकता है. लेकिन अधिकतर क्लाइंट्स को हर छह महीने से एक साल में टचअप कराना पड़ता है. लेजर ट्रीटमेंट के पश्चात जो बाल आते हैं वो पतले, मुलायम और हलके रंग के होते हैं. इसलिए लेजर को अनचाहे बालों से छुटकारा पाने का सब से अच्छा विकल्प माना जाता है. लेजर उपचार की कितनी सीटिंग लेनी होगी और कितना खर्च आएगा यह इस पर निर्भर करता है कि शरीर के किस भाग की त्वचा से बाल निकालना है और वहां बालों का विकास कितना है.