उत्तर प्रदेश की राजधानी में पुलिस ने दो लड़कियों सहित दो ऐसे स्टूडेंट्स को चोरी के इल्जाम में पकड़ा, जिन्होंने लग्जरी लाइफ जीने के लिए 25 लाख रुपये की चोरी की. ऐसी घटनाओं से पता चलता है कि युवा अपराध की तरफ किस तरह से भाग रहे हैं. छोटे छोटे शहरों से पढाई करने बड़े शहरों में आ रहे युवाओं के माता पिता उनके सपनों को पूरा करने के लिये अपनी घर जमीन बेचकर पढ़ने के लिये स्कूल भेजते हैं. बडे शहरों की चकाचौंध में फंस कर युवा अपराध की दुनिया में उलझ जाते हैं. यह कहानी है मीनाक्षी, अंशिका, श्रीधर और शांतनु की.

मीनाक्षी और अंशिका सीआरपीएफ कमांडेंट रमेश कुमार के गोमतीनगर स्थित घर में किरायेदार के रूप में रहती थी. मीनाक्षी लखनऊ विश्ववि़द्यालय से एमबीए की पढाई कर रही थी. उसके पिता पिता छत्तीसगढ़ में अकाउंटेंट हैं. मीनाक्षी के साथ रहने वाली दूसरी लडकी अंशिका सेठ विशम्बर नाथ कॉलेज में बीबीए की पढाई कर रही थी. उसके पिता की मौत हो चुकी है. अंशिका का भाई हरदोई जिले में ग्राम प्रधान है. अंशिका और मीनाक्षी की दोस्ती श्रीधर और शांतनु से थी. यह भी पढाई कर रहे थे. श्रीधर बाबू बनारसीदास कॉलेज का बीडीएस में तीसरे साल की पढाई कर रहा था. उसके पिता रिटायर शिक्षक हैं. शांतनु भी एमबीए की पढाई करता था और लखनऊ के मुंशी पुलिया इलाके में रहता था.

सीआरपीएफ कमांडेंट रमेश कुमार का घर तीन फ्लोर का बना है.पहली मंजिल पर अलग किरायेदार रहते थे. दूसरी मंजिल पर यह दोनो छात्रायें रहती थी.तीसरी मंजिल को रमेश कुमार ने अपने लिये रखा था. रमेश कुमार झारखंड में पोस्टेड है. कुछ समय पहले रमेश कुमार ने अपनी एक जमीन 25 लाख में बेची थी. रमेश कुमार ने यह पैसा घर में तिजोरी में बंद कर रख दिया था. यह बात इन लडकियों को पता चल गई. यह लोग अब उस पैसे को चोरी करने के फिराक में जुट गई. इन लोगों ने पत्रकारपुरम से डुप्लीकेट चाबी बनाने वाले से तिजोरी की चाबी बनवाई और 25 लाख रूपये चोरी कर लिये. इस कैश में चारों ने 6.6 लाख रुपए आपस में बांट लिये. चोरी के पैसे मीनाक्षी और अंशिका ने अपनेअपने लिये स्कूटी खरीद ली. श्रीधर ने पल्सर 220 बाइक खरीदी और शांतनु ने सुजकी की जिल्सर मोटरसाइकिल खरीदी.

अपनी शान औ शौकत को बढाने के लिये मंहगे मोबाइल फोन, ज्वेलरी और होटलबाजी की. मीनाक्षी को मौडलिंग का भी शौक था. इसी पैसे से वह फोटोशूट कराने के लिये हवाई जहाज से मुम्बई गई. मीनाक्षी को घर से हर महीने 25,000 रुपए पॉकेट मनी के रूप में मिलते थे. अंशिका का भाई उसे हर महीने 10,000 रुपए भेजता था. इसके बाद भी इन दोनों लड़कियों के शौक ऐसे थे कि घर के पैसे से पूरे नहीं होते थे.

20 जून को मकान मालिक रमेश ने अपने एक परिचित युवक को झारखंड से लखनऊ वास्तुखंड इलाके में अपने घर कुछ काम से भेजा. जब वह युवक रमेश के घर का ताला खोल अंदर गया, तो घर का पूरा सामान फैला मिला. जिसके बाद उसने रमेश को सूचना दी. गोमती नगर में रहने वाले रमेश के ससुर सुखेन कुमार सिंह ने घर जाकर देखा और चोरी की पुष्टि कर गोमतीनगर थाने में मकुदमा दर्ज करवाया. पुलिस ने शक के आधार सेकेंड फ्लोर पर रह रहीं लड़कियों से पूछताछ की. सख्ती से पूछताछ के बाद लड़कियों ने चोरी की बात कबूल ली. पुलिस ने इन लोगों से 17 लाख रुपए बरामद किये. पुलिस को दो बाइक और दो स्कूटी समेत चोरी का सामान भी बरामद किया है. पुलिस ने पकड़े गए अरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है.