सरिता विशेष

उम्र के आखिरी पड़ाव में अपनों की मार झेलते बुजुर्गों की सुरक्षा पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है. अक्तूबर 2015, मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के ग्राम बडेरी में बेटे ने दौलत की खातिर मां और मामा के साथ मिल कर अपने ही पिता की हत्या कर डाली.

अक्तूबर 2015, शहडोल के पाली थाना के औढेरा गांव में एक युवक अपनी पत्नी को पीट रहा था. उसी दौरान उस का बेटा वहां पहुंच गया और पिता को रोकना चाहा. लेकिन जब पिता नहीं माना तो उस ने पिता पर लाठी से वार कर दिया जिस से उस की मौत हो गई.

सितंबर 2015, जशपुरनगर जिले के दुलदुला थाना क्षेत्र के बांसपतरा टीपन टोली में 25 सितंबर को संतोष राम पिता रतिराम के साथ गांव से शराब पी कर घर पहुंचे. नशे में धुत्त बेटे का मां से किसी बात को ले कर विवाद हो गया. गुस्साए संतोष राम ने मां धनमेत बाई पर लाठी से वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया. 2 सितंबर 2015 को हरियाणा के रोहतक में परिजनों की रोकटोक से नाराज बेटे ने दोस्तों के साथ मिल कर मां की गला घोंट कर हत्या की और पिता पर भी धारदार हथियारों से हमला कर दिया. सभी आरोपी नाबालिग.

मई 2015, उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक व्यक्ति ने जमीन नहीं बेचने पर अपने मांबाप की हत्या कर दी. बेटे ने बिना पुलिस को सूचित किए मांबाप का अंतिम संस्कार कर दिया और लोगों को बताया कि दोनों ने आत्महत्या कर ली.

धन और जमीन का लालच

चंद महीनों में इस तरह की सैकड़ों वारदातें बताती हैं कि बुजुर्ग अपने ही घर में सुरक्षित नहीं रहे. देश के हर कोने में कहीं संपत्ति तो कहीं संबंधों की उलझन के चलते कभी बेटा पिता का कत्ल कर रहा है तो कहीं जमीन हथियाने के लिए करीबी रिश्तेदारों द्वारा मांबाप की सामूहिक हत्या की जा रही है. बिहार का हालिया मामला भी इसी बात की तस्दीक करता है कि बुजुर्गों की नृशंस हत्या के मामले में ज्यादातर अपराधी अपना ही खून होते हैं.

बिहार की राजधानी पटना का पुराना और घना इलाका पटना सिटी की पटनदवी कालोनी. पिछले 19 सितंबर को सुबह 9 बजे चीखपुकार मचती है. 78 साल की दौलती देवी का उस के 55 साल के बेटे विजय के साथ पैसों को ले कर अनबन शुरू होती है. दौलती ने जब विजय को रुपया देने से इनकार कर दिया तो गुस्से से हैवान बने विजय ने अपनी मां को जोर से धक्का दे दिया.

बूढ़ी दौलती मुंह के बल जमीन पर गिर पड़ी और उस के मुंह से खून बहने लगा. दौलती के छोटे बेटे सुजय ने जख्मी मां को उठाया और अस्पताल ले गया. जांच के बाद डाक्टरों ने बताया कि दौलती की मौत हो चुकी है. मां की मौत होने के बाद गुस्साए सुजय ने घर पहुंच कर विजय पर ईंट, पत्थरों और धारदार हथियार से हमला कर दिया. मौके पर ही विजय की मौत हो गई.

इस दोहरे हत्याकांड के पीछे रुपए और जमीन का ही विवाद था. आसपास के लोगों ने बताया कि दौलती और उस के बेटों के बीच अकसर रुपयों के लेनदेन को ले कर जम कर झगड़ा होता रहता था. दौलती के पति फकीरा महतो सरकारी मुलाजिम थे और रिटायर होने के कुछ ही दिनों के बाद उन की मौत हो गई थी. उन की पैंशन दौलती देवी को मिलती थी. पैंशन की रकम को ले कर हमेशा मांबेटों में विवाद होता था. इस के अलावा ढाई कट्ठे (3,350 वर्गफुट) जमीन के कुछ हिस्से में घर बना हुआ था और अगले हिस्से को मोटरगैराज वाले को किराए पर दिया गया था. किराए का पैसा छोटे बेटे सुजय को मिलता था.

विजय की निगाह पैंशन की रकम पर लगी रहती थी और इसी को ले कर वह झगड़ा करता रहता था. कुछ हजार रुपए के लिए विजय ने अपनी मां की जान ले ली. उस ने मांबेटे के रिश्ते को तारतार कर डाला. जमीन के टुकड़े और कुछ रुपयों को हथियाने के चक्कर में पूरा परिवार तबाह हो गया. दौलती और विजय की तो जान गई, सुजय की पूरी जिंदगी अब जेल की सलाखों के पीछे कटेगी. विजय की बीवी किरण देवी और उस की 3 बेटियों के साथ ही सुजय की बीवी रानी की जिंदगी भी तबाह हो चुकी है.

इसी तरह 15 जुलाई, 2014 को पटना के पीरबहोर थाना क्षेत्र के बिहारी साव लेन में कारोबारी धीरज सहाय की गोली मार कर हत्या कर दी गई. पुलिस को इस मामले में आज तक कोई सुराग नहीं मिल सका है. पुलिस को शक है कि संपत्ति हथियाने की नीयत से धीरज के किसी अपने ने ही उस की हत्या की है. मई 2013 में दानापुर के व्यापारी हरिमोहन लाल को नासरीगंज इलाके के उन के घर में चाकुओं से गोद कर मार डाला गया. इस मामले में पुलिस अपराधियों को दबोचने में कामयाब हो गई.

अपराधियों ने बताया कि हरिमोहन के परिवार के ही एक सदस्य ने हत्या की सुपारी दी थी, पर नाम का खुलासा नहीं हो सका. दिसंबर 2012 में पाटलीपुत्र थाना क्षेत्र के इंद्रपुरी महल्ले में देवेश नाम के युवक ने अपनी सौतेली मां व 2 बहनों का खून कर डाला. देवेश ने संपत्ति को हथियाने के लिए एकसाथ 3 लोगों की जान ले ली.

नैशनल क्राइम रिकौर्ड्स ब्यूरो की हालिया रिपोर्ट बताती है कि साल 2014 में देशभर में बुजुर्गों से जुड़े 18,714 मामले अलगअलग पुलिस थानों में दर्ज किए गए और इन मामलों के तहत 19,008 बुजुर्ग अपराध के शिकार हुए.

रिपोर्ट के मुताबिक, बुजुर्गों से जुड़े अपराध के सब से ज्यादा 3,981 मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए. अन्य राज्यों–मध्य प्रदेश में 3,438, तमिलनाडु में 2,121, आंध्र प्रदेश में 1,852, राजस्थान में 1,034 और दिल्ली में 1,021 मामले पुलिस थानों में दर्ज किए गए. बिहार में बुजुर्गों की हत्या, लूट और प्रताड़ना के 496 मामले दर्ज किए गए. इन मामलों में 521 बुजुर्गों को अपराधियों ने निशाना बनाया.

दौलत और रुपयों की खातिर बुजुर्गों के बेटे, रिश्तेदार, दोस्त आदि ही उन का कत्ल करने लगे हैं, जिस से परिवार में भरोसा नाम की चीज खत्म होती जा रही है और अपराध का नया व घिनौना चेहरा सामने आने लगा है. रुपयोंपैसों और जमीनजायदाद के लिए पिता, मां, दादा, चाचा आदि का अपने करीबी रिश्तेदारों द्वारा खून करने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

ब्यूरो के आंकड़ों को देख कर महसूस किया जा सकता है कि रिश्तेदारी और दोस्ती पर दौलत किस कदर भारी पड़ने लगी है. बुजुर्ग और असहाय रिश्तेदारों को मार कर उन की दौलत हड़पने के बढ़ते मामलों से रिश्तों के भरोसे का भी खून हो रहा है.

दौलत को हथियाने के लिए आज अपने खून, अपने जाए ही अपनों का बेरहमी से खून बहा रहे हैं. पुलिस के एक आला अफसर कहते हैं कि ऐसे मामलों में परिवार के सदस्य बड़ी ही सफाई से और मौके का इंतजार कर बड़ी ही चतुराई के साथ हत्या को अंजाम देते हैं. इस से पुलिस को पड़ताल में काफी दिक्कतें आती हैं. ऐसे ज्यादातर  मामलों में हत्यारे या हत्या की साजिश रचने वाले ही शिकायत दर्ज कराते हैं.

हत्या को अंजाम देने के बाद सुबूतों को पूरी तरह से मिटा कर ही वे पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने पहुंचते हैं. इतना ही नहीं, वे समयसमय पर पुलिस जांच के बारे में जानकारी भी लेते रहते हैं और पुलिस को गुमराह कर जांच को दिशा से भटकाने में कामयाब हो जाते हैं. बिहार पुलिस मुख्यालय से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2013 से मई 2015 तक पटना जिले में 699 हत्याएं हुईं, जिन में से 77 फीसदी में किसी न किसी तरह से परिवार के किसी सदस्य या पहचान वालों का ही हाथ था.

गया जिले के एसएसपी मनु महाराज कहते हैं कि जब पुलिस में हत्या की शिकायत दर्ज कराने वाला ही कातिल हो तो पुलिस को जांचपड़ताल में काफी दिक्कतें आती हैं. कई मामलों में यह भी देखा गया है कि बुजुर्ग की हत्या के बाद उन के परिवार वाले हत्या को खुदकुशी का भी रूप देने की कोशिश करते हैं, जिस से कानून के चंगुल से आसानी से बचा जा सके. पंखे से लटकने, नींद की गोलियां खाने, फिनाइल और एसिड जैसी जहरीली व जानलेवा द्रव्यपदार्थ पीने, सीढि़यों से गिरने से मौत होने की साजिश परिवार वाले आसानी से रच लेते हैं. इस के साथ ही यह भी देखा गया है कि पेशेवर हत्यारा मर्डर करने से पहले सौ बार सोचता है और काफी सोचसमझ कर काम करता है. वह ज्यादातर मामलों में बूढ़ों व बच्चों की हत्या नहीं करता है. लेकिन परिचित या रिश्तेदार नौसिखिए होते हैं, अपनी पहचान छिपाने के लिए वे बेरहमी से बूढ़ों व बच्चों की हत्या कर डालते हैं.

पटना हाई कोर्ट के वकील उपेंद्र प्रसाद कहते हैं कि घर के बुजुर्ग को परिवार पर बोझ मानने का चलन तेजी से बढ़ा है. बच्चे सोचने लगे हैं कि बूढ़े मांबाप उन के ऊपर बोझ की तरह हैं. उन की वजह से ही वे अपने बीवीबच्चों के साथ घर छोड़ कर घूमने नहीं जा सकते हैं. इस के अलावा, लड़के उस दौलत को जल्दी पाने के चक्कर में अपनों का खून कर डालते हैं जो दौलत कल आसानी से उन्हीं की होने वाली है. मांबाप की सेवा कर उन्हें जिंदगी के आखिरी पड़ाव में खुश रख कर उन की दौलत पाने के बजाय गैरकानूनी तरीके से उसे पाने की कोशिश करना अकसर उन्हें भारी पड़ जाता है. अपनों की जान लेने के बाद वे अपनों के साथ जायदाद व अपने परिवार को भी खो देते हैं और बाकी जिंदगी उन्हें जेल में काटनी पड़ती है. उन की बीवी और बच्चे की जिंदगियां भी बरबाद हो जाती हैं.

मनोविज्ञानी अनिल पांडे कहते हैं कि जमीनजायदाद को ले कर घरेलू विवादों के बढ़ते मामलों के बीच परिवार वालों को देखनासमझना होगा कि ऐसे विवादों को तूल न पकड़ने दें और न ही ऐसे मामलों को लटका कर रखें. ऐसे मामलों का जितना जल्दी निबटारा कर दिया जाए, परिवार और परिवार वालों के लिए उतना ही अच्छा है. आज की फास्ट लाइफ के बीच रिश्तों और जज्बातों की डोर कमजोर होती जा रही है. यही वजह है कि जराजरा सी घरेलू झड़प या संपत्ति के विवादों में अपनों का खून करने में जरा भी हिचक नहीं होती है. रिश्तों में कड़वाहट इस कदर बढ़ती जा रही है कि बाप बेटे का, बेटा मां का, भाई बहन का, मामा भांजे का, भतीजा चाचा का कत्ल करने में देर नहीं लगाते.

परिवार की संपत्ति को ले कर बढ़ते विवाद को कम करने के लिए बुजुर्ग मांबाप को यह ध्यान रखना होगा कि उन के बच्चों के बीच दौलत व रुपयों को ले कर तनाव की गुंजाइश ही नहीं हो. इस के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रख कर बुजुर्ग अपने बच्चों को खुश रख सकते हैं और अपनी जान पर आफत आने से भी रोक सकते हैं. आज रिश्तों के महत्त्व के कम होने के बीच भी कुछ सावधानी बरत कर रिश्ते और जान दोनों को बचा कर रखा जा सकता है :

– दौलत का बंटवारा बच्चों के बीच कर दें और यह ताकीद कर दें कि उन के मरने के बाद सभी बच्चों को उन की दौलत पर बराबरी का हक होगा.

– अपनी दौलत की वसीयत समय रहते कर दें और बच्चों व परिवार के सभी लोगों को इस की जानकारी दें, ताकि कोई अंधेरे में न रहे.

– घरेलू झगड़ों की अनदेखी न करें, न ही उसे दबाने की कोशिश करें. परिवार के साथ मिलबैठ कर निबटारा कर लें. ऐसा नहीं हो पाता है तो अदालत का दरवाजा खटखटाएं.

– कई ऐसे मामले देखने में आते हैं कि किसी बच्चे के प्रति मांबाप का ज्यादा झुकाव होता है, जिस से बाकी बच्चों में असुरक्षा की भावना बैठ जाती है कि कहीं पिता अपने लाड़ले बेटे को सारी दौलत या दौलत का ज्यादा हिस्सा न दे दें. मांबाप को चाहिए कि किसी बच्चे में ऐसी गलत भावना न आने दें और बच्चों को भी चाहिए कि सभी मांबाप के लिए जिम्मेदार हों, ताकि किसी एक बच्चे की ओर उन का ज्यादा झुकाव न हो.

– अगर किसी बेटे को किसी कारोबार को शुरू करने में रुपयों की मदद करते हैं तो बाकी बेटों और परिवार के सभी सदस्यों को भरोसे में ले कर करें. ऐसा नहीं करने से बेटों के बीच तनाव का माहौल पैदा होने लगता है जो बाद में बड़े झगड़े का रूप ले लेता है. उस के बाद मामला थानाअदालत तक जा पहुंचता है.

– किसी बेरोजगार बेटे को कोई धंधा चालू करने के लिए रुपए दें तो उसे यह हिदायत भी दें कि रुपए कर्ज के तौर पर दिए जा रहे हैं, जिसे धीरेधीरे वापस करना होगा. इस से बेटा धंधे में पूरा मन लगाएगा और बाकी बेटों में किसी तरह की ईर्ष्या की भावना नहीं पैदा होगी.

– घर के किसी भी सदस्य से किसी भी तरह का खतरा होने या किसी के धमकी देने के मामले में बुजुर्ग खामोश नहीं रहें. अपने किसी रिश्तेदार, दोस्त, वकील और पुलिस को इस के बारे में जरूर बताएं.       

विदेशों में स्थिति बेहतर

जहां भारत में बुजुर्गों की सुरक्षा को ले कर सिर्फ कागजी कानून है वहीं विदेशों में, खासकर अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के देशों में, रिटायरमैंट के साथ ही बुजुर्गों के घरों पर वे तमाम तरह की सहूलियतें दी जाती हैं जो उन की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं. भले सीढि़यों से उतरने और बाथरूम्स में रैलिंग या हैंडिल का मामला हो या फिर उन के घरों को पुलिस केंद्रों से फोन के जरिए सीधे जोड़ना, बुजुर्गों को हर मदद तत्काल मिलती है.