28 साल की अर्चना को जेल में एक सप्ताह तक का समय बीत चुका था. उसे अपने किये काम पर अब तक कोई पछतावा नहीं हुआ था. 8 वें दिन उसे पता चला कि जेल में बंद उसके साथी अजय से मिलने उसका भाई आया था. जो जेल में उसके लिये जरूरत का सामान लाया था. जिसमें मंजन, दांत साफ करने का ब्रश और कपडे जैसे जरूरत के छोटे छोटे सामान थे. 22 जनवरी को जब पुलिस ने अर्चना को अपने पति 40 साल के ओमप्रकाश यादव और 4 साल के बेटे नितिन की हत्या के आरोप में पकडा तो कुछ समय तक अर्चना के पिता और दूसरे संबंधी उसके बचाव की कोशिश कर रहे थे. पुलिस ने जब अर्चना और अजय को पकड कर कचहरी में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया तो वहां केवल अर्चना की बहनें ही साथ थी. थाना और कचहरी तक अर्चना ने खुद को संभाल रखा था. जेल में समय बीता तो उसे लगा कि अब पूरी दुनिया में उसका कोई नहीं है. उस दिन अर्चना फूटफूट कर रोई.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की रहने वाली अर्चना यादव की शादी ओमप्रकाश यादव से हुई थी. ओमप्रकाश गोरखपुर में आंखों के डाक्टर थे. अर्चना से उनकी दूसरी शादी थी. अर्चना का घरेलू काम में मन नहीं लगता था, वह राजनीति में अपना कैरियर बनाना चाहती थी. इसके लिये वह प्रयास करने मे लगी थी. अर्चना अपने खाली समय में सोशल मीडिया में काफी एक्टिव रहती थी. फेसबुक और वाट्सअप पर उसने कई दोस्त बना रखे थे. इनमें शिकोहाबाद का रहने वाला अजय यादव भी था. अजय ने अपने फेसबुक पर मुलायम सिंह यादव, शिवपाल, डिंपल और अखिलेश यादव के साथ अपनी फोटो लगा रखी थी. अजय अपने को मुलायम सिंह यादव यूथ बिग्रेड का सचिव बताता था. अर्चना ने उसे देखकर दोस्ती कर ली. फेसबुक से शुरू हुई यह दोस्ती फोन वाट्सअप से होते हुये शारीरिक संबंधों तक पहुच गई. अजय ने अर्चना को कहा था कि वह समाजवादी पार्टी में उसको जगह दिला देगा.

अर्चना के स्वभाव को उसका पति पंसद नहीं कर रहा था. वह बारबार अर्चना को मना कर रहा था. इससे अर्चना को परेशानी होने लगी. इससे दोनो के बीच टकराव होने लगा अजय से दोस्ती के बाद पति से अर्चना दूरियां बढ रही थी. 20 जनवरी को पति और और बेटे की हत्या करने के बाद अर्चना ने आरोप दूसरे पर लगाने शुरू किये. पुलिस ने फोन की जांच और दूसरे सबूतों के आधर पर अर्चना और अजय को जेल भेजा. अर्चना से जब यह सवाल किया गया कि तो उसने कहा ‘मेरा बेटा था मैने मार दिया’. जेल में रहने के बाद अब अर्चना को अपने किये पर पछतावा हो रहा है. अर्चना ने अपने मित्र अजय का बचाव करने का प्रयास भी किया. अब ऐसा पछतावा करने से क्या लाभ?

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