कांग्रेस पार्टी के एक विधायक सिद्धार्थ सिंह, एक लड़की निधि और विधायक सिद्धार्थ सिंह के ड्राइवर पंकज सिंह के बीच चला इश्क, अपहरण और फिर शादी का मामला ऊपरी तौर पर भले ही सुलझाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इस मामले के कई सारे पेंच अभी भी खुले नहीं हैं. पहले तो विधायक सिद्धार्थ सिंह पर निधि का अपहरण करने का आरोप लगा और जब इस मामले ने बिहार की सियासत को गरमा दिया, तो अचानक निधि अपनी मांग में सिंदूर भर कर ड्राइवर पंकज सिंह के साथ सामने आई और उस से शादी रचाने की बात कह कर विधायक सिद्धार्थ सिंह को क्लीन चिट देने की कोशिश की.

कांग्रेस ने फिलहाल भले ही अपने विधायक सिद्धार्थ सिंह को पाकसाफ करार दे दिया हो, लेकिन निधि के पिता अभय सिंह का दावा है कि विधायक सिद्धार्थ सिंह और निधि के बीच पहले से ही इश्क का खेल चल रहा था और विधायक को बचाने के लिए ड्राइवर पंकज सिंह को बलि का बकरा बनाया जा रहा है. 28 जनवरी, 2016 की सुबह के तकरीबन सवा 9 बजे विधायक सिद्धार्थ सिंह का एक आदमी मुकेश शर्मा निधि के घर आया. मुकेश को देख कर निधि के भाई ने अपने पिता को आवाज दी.

मुकेश शर्मा ने पास खड़ी निधि से कहा कि विधायकजी बाहर खड़े हैं और निधि उस के साथ बाहर निकल गई. विधायक सिद्धार्थ सिंह ने उसे अपनी गाड़ी में बैठाया और चलते बने. निधि के पिता ने जब तक हल्ला मचाया, तब तक विधायक की गाड़ी दूर जा चुकी थी. बिहार राज्य की विक्रम विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक सिद्धार्थ सिंह पर नाबालिग लड़की को ले कर फरार होने का केस दर्ज कराया गया. पटना जिले के मसौढ़ी ब्लौक में हुए इस अपहरण कांड ने राज्य के सियासी गलियारे में हलचल मचा दी. निधि के पिता अभय सिंह ने बताया कि 28 जनवरी की सुबह विधायक सिद्धार्थ सिंह उन के घर पहुंचे और उन की नाबालिग बेटी को जबरन उठा कर अपनी गाड़ी में बैठा लिया और भाग निकले.

अभय सिंह ने विधायक सिद्धार्थ सिंह और उन के सहयोगी मुकेश शर्मा के खिलाफ मसौढ़ी थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया. मसौढ़ी के थानेदार अरुण कुमार अकेला ने बताया कि विधायक सिद्धार्थ सिंह के मोबाइल नंबर पर कई बार बात करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया. कुछ देर के बाद उन का मोबाइल फोन स्विच औफ था. पुलिस ने विधायक सिद्धार्थ सिंह पर आईपीसी की धारा 366 और 366ए के तहत मामला दर्ज कर लिया.

गौरतलब है कि विधायक सिद्धार्थ सिंह शादीशुदा हैं. उन की शादी 5 साल पहले हुई थी और उन का 2 साल का बेटा और 3 महीने की बेटी है. पुलिस को निधि का मोबाइल फोन उस के कमरे से मिला था, जिस की काल डिटेल से पता चला कि विधायक सिद्धार्थ सिंह के साथ गायब हुई 20 साला लड़की निधि उर्फ सुधा कुमारी विधायक के ड्राइवर पंकज सिंह को रोज फोन करती थी. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, निधि भले ही पंकज सिंह के फोन पर बात करती थी, पर उस की बात विधायक से ही होती थी. विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सिद्धार्थ सिंह की निधि से मुलाकात हुई थी. उस समय वह अपने ननिहाल नौबतपुर में थी. वह वहां रह कर ही बीए की पढ़ाई कर रही थी. 20 जनवरी को वह ननिहाल से लापता हो गई थी. खोजबीन के बाद पता चला था कि उसे विधायक भगा कर ले गए.

निधि के घर वाले विधायक सिद्धार्थ सिंह के राजेंद्र नगर महल्ले के रोड नंबर-8 के मकान पर पहुंच गए और लड़की को सौंपने की गुहार लगाने लगे. पुलिस ने लड़की के मोबाइल फोन के टावर की लोकेशन के आधार पर उसे पटना के कंकड़बाग महल्ले के पार्वती गर्ल्स होस्टल से बरामद किया था. निधि के घर वालों से विधायक सिद्धार्थ सिंह के माफी मांगने के बाद इस मामले को ले कर थाने में कोई केस दर्ज नहीं किया गया था.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सिद्धार्थ सिंह और निधि के रिश्ते 2 साल से ज्यादा पुराने हैं और वे दोनों गुपचुप तरीके से शिमला के होटल में समय गुजार चुके हैं. इस बात का दावा निधि के पिता अभय सिंह ने ही किया है और सुबूत के तौर पर ट्रेन का रिजर्वेशन टिकट, टूर ऐंड ट्रैवल्स और होटल का बिल पुलिस को दिया है. अभय सिंह का कहना है कि ये सारी चीजें उन्हें निधि के बैग से मिली हैं. निधि की ड्राइवर पंकज सिंह से शादी की बात कर के विधायक सिद्धार्थ सिंह ने मामले को मोड़ने की साजिश रची है, ताकि उन पर कोई आंच न आए. इस अपहरण केस में कई दिनों तक चले हंगामे के बाद 30 जनवरी, 2016 को निधि और पंकज सिंह ने मसौढ़ी सिविल कोर्ट में सरैंडर किया और निधि ने बयान दिया कि वह खुद पंकज सिंह के साथ मोटरसाइकिल से खगौल गई थी. वहीं से वह भोजपुर के बखोरापुर मंदिर गई, पर वहां के पुजारी ने शादी कराने से मना कर दिया. इस के बाद वह पंकज सिंह के साथ बनारस चली गई. वहीं मंदिर में शादी की. उस के साथ किसी ने कोई जोरजबरदस्ती नहीं की है और न ही उस का अपहरण किया गया है. उस ने अपने पिता द्वारा किए गए पुलिस केस को गलत करार दिया है. निधि ने कोर्ट को बताया कि वह पिछले 2 साल से पंकज सिंह को जानती है और वे दोनों एकदूसरे से प्यार करते हैं. इस बात की जानकारी उस के घर वालों को भी है. निधि ने कोर्ट से यह भी कहा कि वह विधायक सिद्धार्थ सिंह के बारे में ज्यादा नहीं जानती है. उन्हें 1-2 बार पंकज सिंह के साथ ही देखा था.

लेकिन पिता अभय सिंह का कहना है कि विधायक बनने से पहले ही सिद्धार्थ सिंह और निधि की जानपहचान हुई थी. साल 2014 में सिद्धार्थ सिंह ने विक्रम इलाके में आंखों का कैंप लगवाया था, वहीं निधि अपनी नानी की आंख का आपरेशन कराने पहुंची थी. निधि की नानी के आपरेशन के बाद सिद्धार्थ ने निधि का मोबाइल फोन नंबर ले लिया. इस के बाद से ही उन दोनों में पहचान बनी हुई थी और निधि को बहलाफुसला कर सिद्धार्थ सिंह अपनी मनमानी करता रहा. अभय सिंह का यह भी दर्द है कि निधि के गायब होने और फिर शादी रचा कर सामने आने के ड्रामे के बाद निधि की बड़ी बहन की सगाई टूट गई है. फरवरी में ही उस की शादी होनी थी. वे कहते हैं कि अब उन की बेटी की शादी होना मुश्किल लग रहा है.

गौरतलब है कि विधायक सिद्धार्थ सिंह के ड्राइवर पंकज सिंह की शादी साल 2009 में भोजपुर जिले के जगदीशपुर सुंदरा गांव की सुशीला देवी से हुई थी. उस की 4 साल की बेटी वर्षा और 3 साल का बेटा आदित्य है. ड्राइवर पंकज सिंह ने कोर्ट को बताया कि निधि को उस के शादीशुदा होने से कोई परेशानी नहीं है. उन के इश्क की जानकारी उस की बीवी और परिवार को पहले से ही है.पटना के एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि एक बीवी होने के बाद भी दूसरी लड़की से शादी करने के लिए पंकज सिंह पर धारा 494 के तहत केस दर्ज किया जाएगा. पटना सिविल कोर्ट के वकील अनिल कुमार सिंह कहते हैं कि ऊपरी तौर पर देखने से तो यही लग रहा है कि इस हाईप्रोफाइल मामले को दूसरा रंग देने और उसे दबाने की साजिश रची गई है. पहले लड़की का अपहरण, फिर लड़की का विधायक के ड्राइवर पंकज सिंह के साथ सब के सामने आने और उस से शादी की बात करने के पीछे कई पेंच हैं.                             

कौन हैं सिद्धार्थ सिंह

साल 1998 में जब सिद्धार्थ सिंह महज 15 साल के थे, उस समय उन पर हत्या करने का आरोप लगा था. उन्होंने अपने दोस्त अभिषेक शाही को कोचिंग सैंटर से बाहर बुला कर गोली मार दी थी. अभिषेक के पिता डाक्टर और दादा जज थे. इस हाईप्रोफाइल मर्डर केस में पुलिस ने सिद्धार्थ सिंह को गिरफ्तार कर लिया था. पटना के कदमकुआं थाने में उन के खिलाफ हत्या और आर्म्स ऐक्ट के तहत केस नंबर- 574/98 दर्ज किया गया था. पुलिस की जांच के बाद यह पता चला था कि सिद्धार्थ सिंह जिस लड़की को चाहते थे, वह लड़की अभिषेक को पसंद करती थी. सिद्धार्थ सिंह को उम्रकैद की सजा मिली थी, पर उस समय उन्हें नाबालिग होने का फायदा मिला था. किशोर न्याय अधिनियम के तहत 15 मई, 2009 को वे कैद से रिहा कर दिए गए. उन के पिता डाक्टर उत्पलकांत पटना के मशहूर चाइल्ड स्पैशलिस्ट हैं. साल 2010 में सिद्धार्थ सिंह ने लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट से पहली बार विक्रम सीट से बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा था, पर महज 2348 वोटों से हार गए थे. उन्हें 36 हजार, 617 वोट मिले थे, जबकि भारतीय जनता पार्टी के विजयी उम्मीदवार अनिल कुमार को 38 हजार, 965 वोट मिले थे.

उस के बाद सिद्धार्थ सिंह ने राजनीति में ही अपना कैरियर बनाने की ठानी. डाक्टर पिता की मदद से वे अपने चुनाव क्षेत्र विक्रम में लगातार 5 सालों तक मुफ्त ही मैडिकल कैंप लगाते रहे, जिस से वहां उन की अच्छीखासी पैठ बन गई. साल 2015 में वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे और उन्हें कामयाबी मिल गई.