अवैध संबंधों के रिश्ते बडे लोगों के बीच बनते है पर इनकी सजा बच्चों को भुगतनी पडती है.अवैध संबंधों के खुलासे परिवार के लिये तबाही लेकर आते है.जिनकी सजा बच्चो को भुगतनी पडती है.ताजा मामला लखनऊ की बक्शी का तालाब तहसील के इंटौजा थाने की है.इंटौजा थाने के गोहनाखुर्द गांव में रामस्वरूप रावत अपनी पत्नी कुसुमा , मां बिटटो, 5 साल का बेटा संजय और 3 साल की बेटी रीना के साथ रहता था.

7 साल पहले रामस्वरूप रावत की शादी रामधीन पुरवा निवासी कुसुमा से हुई थी.कुसुमा के बेटी होने के कुछ दिन बाद ही उसके करीबी रिश्ते भानु प्रताप सिंह से हो गये.भानु प्रताप सिंह के गांव में ही ईंट के भटठा प्रताप ब्रिक फील्ड है.बिसंवा में उसका दूसरा इंर्ट भटठा भी है.रामस्वरूप को दवाब में रखने के लिये भानु प्रताप सिंह ने 2 बीघा आम की बाग खरीदी और उसकी रखवाली करने का काम उसे सौंप दिया.वह रामस्वरूप की मदद करता रहता था.रामस्वरूप को यह पता नहीं था कि कुसुमा और भानुप्रताप के संबंध है.

कुछ समय पहले एक दिन रामस्वरूप ने कुसुमा और भानुप्रताप को आपत्तिजनक हालत में देख लिया था.इस बात पर खफा होकर वह भानुप्रताप के घर गया और उनके बडे भाई शिवा से शिकायत करते धमकी दी कि अगर यह काम बंद नहीं हुआ तो वह पूरी कहानी सबको बता कर आत्महत्या कर लेगा.इस बात को लेकर भानुप्रताप की अपने घर वालों से नोकझोंक भी हुई पर दोनो सुधरने का तैयार नहीं हुये.भानु और कुसुमा के संबंधों को लेकर रामस्वरूप ने कुसुमा को भी बहुत बुरा भला कहा था.इसके बाद भी कुसुमा सुधरने का तैयार नहीं थी.रामस्वरूप में विरोध दबाने के लिये कुसुमा ने भानु के साथ मिलकर उसे रास्ते से हटाने की योजना तैयार की.योजना के अनुसार गुरूवार 26 मई को देर शाम कुसुमा ने रामस्वरूप से कच्चे आम लाने को कहा.इस पर वह आम लाने के लिये आम की बाग गया.

रामस्वरूप के घर से निकलते ही कुसुमा ने भानु को फोन कर रास्ते के कांटे को हटाने का संदेश दिया.आम के बाग में भानु अपने साथ बबलू और लल्लू को लेकर तैयार था.बबलू पहले भी एक अपराध में जेल जा चुका था.भानु ने उसको 2 लाख रूपये देने का लालच देकर अपना साथ देने के लिये राजी किया था. लल्लू को गढढा खोदने के बदले नई पैंटशर्ट देने का वादा किया था.रामस्वरूप के बाग पहुंचते ही भानु और बबलू ने गला घोट कर उसकी हत्या कर दी.इस बीच कुसुमा भी दोनो बच्चों को सुलाकर वहां पहुंच गई.

रात करीब 11 बजे रामस्वरूप के शव को त्रिपाल में लपेट कर 2 किलोमीटर दूर सरायदामू नहर के किनारे लल्लू द्वारा खोदी गई कब्र में दबा दिया.कुसुमा और बाकी लोग अपने घर चले गये.शुक्रवार की सुबह कुसुमा पति की तलाश में बाग गई और वहां पडी चप्पल और अंडरवियर लेकर थाने गई. 28 मई को पुलिस ने रामस्वरूप की लाश को गढढे से खोद कर बरामद कर ली.लखनऊ के पुलिस अधीक्षक ग्रामीण प्रताप गोपेन्द्र यादव और थानाध्यक्ष महेन्द्र यादव ने बताया कि पुलिस को छानबीन में भानु और कुसुमा के संबंधों का पता चला. इसके बाद दोनो से पूछताछ की तो सच सामने आ गया.रामस्वरूप की हत्या और कुसुमा के जेल जाने के बाद उसके दोनो बच्चे अनाथ हो चुके है.उनको बिना किये अपराध की सजा मिल रही है.