हम व हमारे पारिवारिक मित्र सतीश शाम को खाना खाने के बाद घूम रहे थे. एक पतलादुबला सा कुत्ता हम पर भूंकने लगा. सभी उस से बच कर निकलने लगे. मेरे पति ने उस पतलेदुबले कुत्ते से कहा, ‘नो टाइगर, नो.’ ऐसा एकदो बार कहने पर वह एकदम चुप हो गया और पूंछ हिलाने लगा. सतीश ने पूछा, ‘‘यह चुप कैसे हो गया?’’

मेरे हाजिरजवाब पति ने कहा कि जब एक सिपाही को थानेदार और एक बाबू को साहब कहने पर वे प्रसन्न हो जाते हैं तो एक मरियल से कुत्ते को टाइगर कहने पर वह खुश नहीं होगा? इस बात पर सभी बिना हंसे नहीं रह सके.

आशा शर्मा, बूंदी (राज.)

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मेरे दूर के रिश्तेदार जनता पार्टी के टिकट से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे. जीतने के लिए वे काफी मेहनत कर रहे थे. उन के साले वीरेंद्र अंधविश्वासी होने के कारण हर काम के लिए बाबा या तांत्रिक से सलाह लेते थे. वीरेंद्र अपने जीजा के पास गए और बोले, ‘‘जीजाजी, आप चुनाव निश्ंिचत हो कर लड़ें. मैं ने अपने बाबा से आप के विषय में बातचीत की थी. वे बोले कि आप के जीजा भारी मतों से चुनाव जीतेंगे.’’ यह बात वीरेंद्र ने अपने पिता के अलावा परिवार के प्रत्येक सदस्य को बताई. चुनाव परिणाम आने पर उन का जीतना तो दूर, वे भारी मतों से दूसरे प्रत्याशी के मुकाबले हार गए. उन की जमानत तक जब्त हो गई. वीरेंद्र के घर आने पर उन के पिताजी ने पूछा, ‘‘बाबा अब क्या कह रहे हैं?’’ यह बात सुनते ही वीरेंद्र का चेहरा फक पड़ गया. परिवार के बाकी लोग उन की बात सुन कर हंसने लगे.

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