अगले साल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा की तरह सपा ने भी दूसरे दलों के बगावतियों और असंतुष्टों के लिए पार्टी के दरवाजे खोल दिए हैं. रीता बहुगुणा के बारे में अफवाह फैल चुकी है कि वे सपा में जा रही हैं और इस बाबत डील फाइनल हो चुकी है. इधर, रीता कांग्रेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रही हैं जिस से सस्पैंस और बढ़ता जा रहा है. अफवाह को पैदा करने और तूल देने वाले उन के स्पष्टीकरण के बाद यह गिनाने में लगे हैं कि उन के भाई विजय बहुगुणा उत्तराखंड ड्रामे के बाद भाजपा में शामिल हो गए. एक तीसरा वर्ग उन लोगों का है जिन की इस बात में दम है कि रीता कांग्रेस में रहें या सपा में जाएं, फर्क किसे और क्या पड़ना है.