खुद को कांग्रेसी नर्सिंग होम में पैदा हुआ बता रहे नवजोत सिंह सिद्धू बड़े ड्रामाई अंदाज में यह कहते हुए कांग्रेसी नाव में सवार हुए थे कि भाजपा तो उन की कैकेयी मां जैसी थी. यह पौराणिक मिसाल देना उन के भाजपाई संस्कार थे. उम्मीद थी कि माता कौशल्या की गोद में आ कर उन्हें सुरक्षा महसूस होगी, लेकिन हुआ उलटा. कांग्रेस ने कैकेयी से भी ज्यादा क्रूरता और सौतेलापन दिखाते उन्हें कुरसी वाला वह खिलौना नहीं दिया जिस के लिए वे मुद्दत से मचलते सौदेबाजी कर रहे थे. पहले क्रिकेट और फिर छोटे परदे पर लोगों को हंसा कर शोहरत बटोरने वाले सिद्धू राजनीति में भी एक दायरे में सिमट कर रह गए हैं जिन का पंजाब चुनावप्रचार में कांग्रेस अधिकतम इस्तेमाल कर रही है. कौमेडी शो में सारा क्रैडिट कपिल शर्मा के खाते में जाता रहा तो क्रिकेट में श्रेय सुनील गावस्कर लूटते रहे और अब राजनीति में भी कैप्टन ने कप्तानी का मौका छीन लिया तो इसे बदकिस्मती के अलावा कुछ और कहा भी नहीं जा सकता. वे प्रकट तो हुए पर कृपाला और कौशल्या हितकारी नहीं बन पाए.

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