सरिता विशेष

मैं45 वर्षीय विवाहिता, 2 बच्चों की मां हूं. प्रेमविवाह के कारण हम अलग रहने लगे थे. मेरी ससुराल वालों ने मेरे 4 वर्षीय देवर को मेरे पास भेज दिया जिसे मैं ने प्यार व दुलार से पाला. 8वीं कक्षा के बाद वह गांव चला गया.  इधर, शादी के 20 वर्ष बाद पति बीमार पड़ गए, तब अचानक वह देवर हमारे पास आया और मुझ से उस ने अजीब सी बात कही, ‘भाई तो ठीक होने वाले नहीं हैं, मैं ही आप का ध्यान रखूंगा,’ बाद में वह उलटीसीधी हरकतें करने लगा जिसे मैं ने कई बार टाला, डांटा भी. उस ने समझा भी और पैर छू कर मुझ से माफी भी मांगी. 

मुझे उस से चिढ़ हो गई है. मैं ने पति को भी सब बता दिया. उस के प्रति मेरे अब के व्यवहार को मेरे रिश्तेदार गलत लेते हैं क्योंकि वे बीच की बात नहीं जानते. मुझे बताइए, मैं कैसे सामान्य व्यवहार करूं जिस से घर का माहौल सामान्य हो जाए? 

बेशक आप के बच्चे समान देवर ने गलत व्यवहार किया जो सर्वथा निंदनीय है पर आप उस की मानसिकता को समझिए. आप ने बचपन से उस को दुलार दिया, बेशक बेटे समान पर वह आप से जुड़ा  और युवा होते उस के मन में आप की ही तसवीर अंकित हो गई जो एकदम गलत तो है पर युवावस्था की ओर जाते बच्चों में विपरीत सैक्स के प्रति आकर्षण अकसर हो जाता है. इसी वजह से वह आप से गलत हरकत तक कर बैठा और जिस से आप ने अपनी समझदारी से नजात भी पा ली.

जाहिर है कि आप को उस से नफरत होगी पर घर के रिश्ते व मर्यादा को बरकरार रखने के लिए आप उसे माफ कर दें. आप उस से अब कम से कम टू द पौइंट ही बात करें. ऐसा करने से स्थिति सामान्य हो सकती है.

मैं 25 वर्षीय विवाहित पुरुष, भारतीय सेना में कार्यरत हूं. शादी को 2 साल हुए हैं. समस्या पत्नी को ले कर है. मेरे ड्यूटी पर जाते ही वह मायके चली जाती है. मैं घर आ कर उसे लेने जाता हूं और घर आ कर भी वह सारे समय मां से लड़ाईझगड़ा करती रहती है. घर का काम तक नहीं करती. मैं दिनरात समझाता हूं पर वह नहीं समझती. 

ससुर से बात करूं तो वे धमकाते हैं कि दहेज का केस बनवा देंगे. जबकि आज तक हम ने न दहेज की बात की, न उस से बुरा व्यवहार किया. मैं मानसिक रोगी जैसा हो गया हूं. मैं तो बस घर में खुशी चाहता हूं. क्या वे लोग कुछ केस बना देंगे? आप से समाधान चाहता हूं, क्या करूं?

आप भारतीय सेना में कार्यरत ऐसे पुरुष हैं जिस पर समूचा राष्ट्र गौरव करता है. पर खेद की बात है कि जहां आप ने विवाह किया है वे बेहद गलत किस्म के लोग हैं, ऐसे लोग अपनी बेटी को उलटासीधा सिखा कर उस का घर बरबाद कर देते हैं. आप के सासससुर भी ऐसी प्रवृत्ति के ही नजर आते हैं.

आप क्यों मानसिक संतुलन खराब कर रहे हैं. यह तो तय है कि वह लड़की भी इन सब में शामिल है, शायद वह आप के साथ निभाना ही नहीं चाहती.

आप ने पूछा कि क्या वे दहेज का झूठा केस बना देंगे, तो वे इसी घटिया शान में तो आप को परेशान कर रहे हैं. ऐसे में आप को यह चाहिए कि सेना के नियमों के अनुसार, पुलिस में या सेना में पहले ही यह रिपोर्ट दर्ज करवा दें कि इस तरह आप को वे लोग परेशान कर रहे हैं और दहेज का झूठा केस बनाने की धमकी दे रहे हैं. आप अपने विभाग के लीगल सैल से भी जानकारी ले सकते हैं. आप के पहले से केस दर्ज कराने से वे कुछ भी न कर पाएंगे.

आप अपने को कमजोर न समझें, आप का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. इस बीच उस लड़की की खुशामद कतई न करें और उस से बात करनी ही बंद कर दें.

मैं 14 वर्षीय बेटी की मां हूं. उस के कद व वजन को ले कर परेशानी है. 3 वर्षों से उसे पीरियड्स भी हो रहे हैं. अथक प्रयास के बाद भी उस के 56 किलो वजन को कम नहीं कर पाई, न ही लंबाई, जो 5 फुट है, बढ़ा पाई. आप से यह जानना चाहती हूं कि कद बढ़ा कर कैसे वह आकर्षक दिख सकती है?

वजन घटाने के लिए आप की बेटी के व्यायाम करने के साथसाथ खानपान भी देखना होगा. इस उम्र में बच्चे जंकफूड के बहुत शौकीन हो जाते हैं. आप उस की डाइट को किसी डाइटीशियन की मदद से चैक करवाइए. कोई जिम भी जौइन करवा सकती हैं.

रहा सवाल कद बढ़ने का तो अभी वह 14 वर्ष की है, 5 फुट की है, तो अभी उस का कद थोड़ा और बढ़ सकता है. कद बढ़ाने की कोई दवा नहीं होती, आप व्यर्थ के चक्करों में न पड़ें. उस का वजन कम होगा तभी वह आकर्षक लगेगी, अभी कद बढ़ेगा भी और फिर बड़ी होने के बाद थोड़ी हील वगैरह पहन कर वह आकर्षक लगेगी.

मैं 34 वर्षीय, 2 बच्चों की मां हूं. हमारा संयुक्त परिवार है. देवर की बुरी लतों के कारण सासससुर देवरानी व उन के बच्चों को ही पूछते हैं. पूरे परिवार की जिम्मेदारी मेरे पति पर है. कभीकभी दिल चाहता है कि आत्महत्या कर लूं. भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए मार्गदर्शन करें, क्या जीवनभर इतना दायित्व संभव है?

आप एक जुझारू, कर्तव्यपरायण महिला हैं. आत्महत्या करना आप को शोभा नहीं देता. सासससुर व पति से बात कर के देवर की बुरी लत को छुड़ाने का प्रयास करें. अगर तब भी बात न बने तो पति के साथ अलग रहने की बात कहें. शायद तब देवर को भी अक्ल आ जाए और वे अपनी जिम्मेदारी उठाने लगें.