मेरी मां की उम्र 70 वर्ष है. पिता के गुजर जाने के बाद उन्हें अकेलापन महसूस होता है. वे किसी सोशल नैटवर्किंग से जुड़ना चाहती हैं जहां वे अपना खाली समय बिता सकें और जरूरतमंदों की सहायता भी कर सकें. कृपया मार्गदर्शन करें. 

अगर आप की मां शिक्षित हैं तो उन से कहिए कि वे छोटे बच्चों को पढ़ाने का कार्य करें. इस से उन का समय तो व्यतीत होगा ही, बच्चों को शिक्षित करने में खुशी भी मिलेगी. आमदनी होगी सो अलग. इस से उन का अन्य लोगों से मेलजोल भी बढ़ेगा. अगर वे खाना पकाने में दक्ष हैं तो कुकरी क्लासेज या कैटरिंग का काम भी घर बैठे कर सकती हैं. मदद के लिए सहायक रख लें. ऐसा करने से आर्थिक मदद तो होगी ही, साथ ही समय का सदुपयोग भी होगा. इस आयु के हर जने को उम्र के इस पड़ाव की समस्याओं के प्रति एहसास भी होना चाहिए क्योंकि ज्यादा काम या तनाव नुकसानदायक भी हो सकता है.

*

मैं विवाहित पुरुष हूं. विवाह को 7 साल हो गए हैं. विवाह के बाद बहुत देर से मेरे बच्चा हुआ है. मैं अपनी बीवी और बच्चे को बहुत प्यार करता हूं. समस्या यह है कि दूर के रिश्ते में मेरी एक भाभी हैं. उन के विवाह को 10 वर्ष हो गए हैं. उन के अभी तक कोई संतान नहीं है. डाक्टरों का कहना है कि पति की शारीरिक कमी के कारण वे मां नहीं बन पाएंगी. भाभी चाहती हैं कि संतान उत्पत्ति में मैं उन का साथ दूं ताकि वे मां बनने का सुख प्राप्त कर सकें. मैं क्या करूं, उचित सलाह दीजिए.

आज के वैज्ञानिक युग में नित नए आविष्कार हो रहे हैं. निसंतानों के लिए संतानप्राप्ति के लिए आईवीएफ जैसी तकनीक उपलब्ध है जिस के सहारे कोई भी दंपती संतानप्राप्ति का सुख पा सकता है. इस के लिए आप किसी आईवीएफ स्पैशलिस्ट से संपर्क करने को कहें. भाभी की मदद का खयाल मन से निकाल दें. यह बेवकूफीभरा कदम होगा जो न केवल आप के व आप की पत्नी के बीच के रिश्ते को उलझाएगा बल्कि आप के भाभी के साथ के रिश्ते को भी कठिन बना देगा व समाज भी इसे गलत निगाह से देखेगा.

*

मैं 20 वर्षीय अविवाहित हूं. मैं जहां नौकरी करता हूं वहां मेरे साथ एक अन्य लड़की भी कार्य करती है. मैं उस से प्यार करने लगा हूं. समस्या यह है कि मैं हिंदू धर्म का हूं और वह लड़की मुसलिम धर्म की है. वह मेरे धर्म के बारे में कुछ नहीं जानती. मैं जब भी उस की ओर देखता हूं वह भी मुड़मुड़ कर मेरी तरफ देखती है. मैं उस से अपने प्यार का इजहार करने से डरता हूं. मुझे लगता है कि कहीं वह सब के सामने मना न कर दे या उसे बुरा लगे और वह मेरे साथ कोई गलत व्यवहार कर दे. मैं क्या करूं, राय दीजिए.

प्यार के बीच धर्म कहां से आ गया. अगर आप उसे पसंद करते हैं, चाहते हैं तो उस से अपने प्यार का इजहार कीजिए. उस की भावनाओं को जानिए कि क्या वह भी आप से प्यार करती है या सिर्फ दोस्ती चाहती है. अगर उस की तरफ से जवाब हां में मिलता है तो बात को आगे बढ़ाइए. अपने परिवार वालों से इस बारे में बात कीजिए. बिना लड़की की फीलिंग्स जाने खयाली पुलाव मत पकाइए.

*

मैं विवाहिता हूं. विवाह को 6 वर्ष हो चुके हैं. विवाह के बाद कुछ दिनों तक तो सब ठीक रहा लेकिन बाद में पता चला कि वे विवाह से पूर्व शराब बहुत पीते थे. उन्होंने अब फिर से शराब पीनी शुरू कर दी है. मैं मना करती हूं, समझाती हूं तो मानते नहीं और मुझ पर शक अलग करते हैं, मारपीट करते हैं. मैं और वे आंगनवाड़ी में कार्य करते हैं. वे अपनी आय का कोई हिसाब नहीं देते. मैं एक अनाथ हूं. दुनिया में मेरा कोई और नहीं है. मैं अलग रहने के लिए कहती हूं, तो अलग रहने नहीं देते. बहुत परेशान हूं. क्या करूं, राय दीजिए.

आप के केस में अच्छी बात है कि आप आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं. नशा किसी भी खुशहाल परिवार को बरबाद करने का कारण बनता है. यही आप के साथ भी हो रहा है. आप अपने पति की नशे की लत को छुड़ाने के लिए किसी नशामुक्ति केंद्र से संपर्क करें. उन से खुल कर सीधेसीधे बात करें. अगर मानते हैं तो ठीक है वरना कानूनी कदम उठाने की धमकी दीजिए. ऐसा करने से वे अवश्य राह पर आ जाएंगे.

*

मैं 22 वर्षीय विवाहिता हूं. विवाह को 2 वर्ष होने वाले हैं. समस्या यह है कि मैं एक संयुक्त परिवार में रहती हूं जिस में रहने के नाम पर केवल 2 कमरे हैं और सदस्य काफी अधिक हैं. एक कमरे में मेरे जेठ, जेठानी और उन का बच्चा सोता है जबकि दूसरे कमरे में मैं, मेरे पति, सास, ससुर व ननद सोती है जिस की वजह से हमारे बीच पतिपत्नी का रिश्ता भी नहीं बन पाया है. मैं पति से कई बार अलग कमरे के लिए कह चुकी हूं पर वे मेरी बात को टाल देते हैं. मैं ने इस बारे में सास से भी बात की है. वे भी मेरी बात को टाल देती हैं. इसी वजह से हम परिवार बढ़ाने के बारे में भी नहीं सोच पा रहे हैं. क्या करूं, समझ नहीं आता. सलाह दीजिए.

यह सरासर आप के साथ ज्यादती है. आप इस बारे में खुल कर सख्त शब्दों में घर वालों से बात कीजिए. सास आप की बात को इसलिए अनदेखा कर रही हैं क्योंकि वे इस से प्रभावित नहीं हैं. जिंदगी आप की प्रभावित हो रही है, इस के लिए आप को ही कदम उठाना होगा. आप पति से साफसाफ कहिए कि वे अलग कमरे का इंतजाम करें वरना मैं मायके चली जाऊंगी. वे इसे बहुत दिनों तक बरदाश्त नहीं कर पाएंगे, साथ ही घर वाले भी समाज के सामने यह बात जाहिर नहीं होने देना चाहेंगे. इसलिए वे जरूर आप की बात सुनेंगे और हल निकालेंगे.