मैं और मेरे पति एकदूसरे से बेहद प्यार करते हैं. मेरी समस्या यह है कि कभीकभी मुझे अपने पुराने बौयफ्रैंड की याद आती है और उस से बात करने का मन करता है. पर अभी तक मैं ने कभी अपने पति का भरोसा नहीं तोड़ा है और न ही तोड़ना चाहती हूं. मैं ऐसा क्या करूं कि मेरे मन से बौयफ्रैंड का खयाल हमेशा के लिए चला जाए?

बौयफ्रैंड की याद आना कोई गलत बात नहीं है. याद तो मातापिता, भाईबहन, दोस्तों की भी आती है. इस बात को ले कर अपने अंदर अपराधभाव न पालें और इस बात को अधिक तूल न दें और न ही इस बारे में पति से कोई बात करें.

बौयफ्रैंड की याद आने को सामान्य समझ कर पति के साथ अपना पारिवारिक जीवन सुखमय तरीके से व्यतीत करें. दोस्तों की याद आना और उन से बात करने का मन होना सामान्य भाव है. इसे पति का भरोसा तोड़ने से भी न जोड़ें. आप व्यर्थ ही छोटी सी बात को तूल दे रही हैं, इस ओर ज्यादा ध्यान न दें और खुशहाल वैवाहिक जीवन बिताएं.

मेरे पति बेहद रोमांटिक स्वभाव के हैं. वे चाहते हैं कि हम रोज सैक्स करें. लेकिन मुझे रोजरोज यह अच्छा नहीं लगता. मैं मना करती हूं तो वे बुरा मान जाते हैं. वैसे भी सैक्स करने के बाद मुझे वेजाइना में जलन महसूस होती है. मैं क्या करूं कि पति भी नाराज न हों और मेरी समस्या का समाधान भी हो जाए?

आप को गर्व होना चाहिए कि आप को इतना प्यार करने वाले पति मिले हैं. वरना अधिकांश पत्नियां तो इस बात के लिए परेशान रहती हैं कि उन के पति सैक्स संबंधों में रुचि नहीं दिखाते. जहां तक सैक्स करने के बाद वेजाइना में जलन की समस्या है तो आप इस के लिए किसी अच्छी गाइनोकोलौजिस्ट से मिलें.

सैक्स संबंधों में अरुचि दिखा कर अपने वैवाहिक जीवन से खुशियों को दूर न करें. शायद आप नहीं जानतीं कि सैक्स पतिपत्नी के बीच मधुरता लाता है और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी रोज सैक्स करना लाभदायक होता है. सैक्स भागदौड़ भरी जिंदगी से तनाव को भी दूर करने में मददगार होता है. इसलिए बिना किसी सोच व चिंता के पति की चाहत को अपनाकर सुखमय जीवन व्यतीत करें.

 

मैं 30 वर्षीय विवाहित पुरुष हूं. मेरी हाल ही में अरेंज मैरिज हुई है. मैं ने शादी से पहले अपनी लाइफ पार्टनर को ले कर बहुत सारी कल्पनाएं की थीं लेकिन वास्तविकता में वह उन कल्पनाओं से बिलकुल अलग है जिस की वजह से मैं उस से भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ पा रहा हूं. शारीरिक संबंध बनाते समय भी मेरे जेहन में उस लड़की की तसवीर उभरती है जिस की मैं ने कल्पना की थी. क्या मैं खुशहाल शादीशुदा जीवन व्यतीत कर पाऊंगा? यह सोचसोच कर मैं परेशान रहता हूं. मुझे लगता है जैसे मैं अपनी पत्नी के साथ धोखा कर रहा हूं. कोई उपाय बताएं?

आप की पत्नी अब आप की लाइफपार्टनर है जिस के साथ आप को अपनी पूरी जिंदगी बितानी है. विवाह आप की रजामंदी से हुआ था, किसी ने आप के साथ जोरजबरदस्ती नहीं की न ही किसी ने दबाव डाला था. कल्पनाओं से परे जा कर वास्तविकता को जीवन का आधार बनाएं. कल्पनाओं में जीना समझदारी नहीं है. अपनी पत्नी को अपनी कल्पनाओं के अनुसार ढालें और उसी के साथ जीवन की खुशियां ढूंढ़ें. पत्नी के साथ मन से जुड़ें, शारीरिक रूप से आप खुदबखुद जुड़ जाएंगे और आप का वैवाहिक जीवन भी खुशहाल हो जाएगा.

 

मैं 35 वर्षीया विवाहिता, 2 बच्चों की मां हूं. मैं और पति दोनों कामकाजी हैं. मेरी समस्या यह है कि पति बच्चों की पढ़ाई के प्रति अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं समझते. बच्चों को पढ़ाने से ले कर स्कूल की हर गतिविधि की जिम्मेदारी मेरी है. आज तक वे कभी बच्चों की पेरैंट्सटीचर मीटिंग में नहीं गए. यदि मैं नाराज होती हूं तो कहते हैं, तुम इतने अच्छे से मैनेज तो कर रही हो. दरअसल, जब पति जिम्मेदारी नहीं लेते तो मुझे ही सब करना पड़ता है. कई बार मैं झुंझला जाती हूं पर उन पर कोई असर नहीं पड़ता, क्या करूं?

आप के पति आप की काबिलीयत पर विश्वास करते हैं, इसलिए उन्होंने बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी आप पर छोड़ दी है. यह तो अच्छी बात है कि पति बच्चों की शिक्षा को ले कर आप पर निर्भर हैं वे केवल बच्चों की शिक्षा की ही तो जिम्मेदारी नहीं उठाते, बाकी जिम्मेदारियां तो पूरी करते ही हैं.

आप को गर्व होना चाहिए कि आप के पति आप के आत्मविश्वास और टेलैंट की तारीफ करते हैं. वैसे भी आप की शिक्षा का इस से बेहतर सदुपयोग और क्या होगा कि आप अपने बच्चों की शिक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं. इसलिए बच्चों की पढ़ाई के प्रति पति के ढीले रवैये को ज्यादा महत्त्व न दें और अपनी जिम्मेदारी को सही ढंग से पूरा कर के पति को खुश करें और उन के दिल पर राज करें.

 

मैं अपनी भाभी की छोटी बहन से बहुत प्यार करता था और वह भी मुझे चाहती थी लेकिन उस के घर वालों ने उस का विवाह दूसरी जगह कर दिया. मैं आज भी उसे भूल नहीं पा रहा हूं. मैं क्या करूं?

आप कह रहे हैं कि भाभी की बहन का विवाह दूसरी जगह हो गया है फिर भी आप उस के प्यार व यादों में उलझे हुए हैं. आप की तरफ से प्यार सच्चा था पर उस की तरफ से नहीं. अगर उस का प्यार सच्चा होता तो वह दूसरी जगह विवाह के लिए कभी तैयार न होती. अब उस का विवाह हो चुका है, उसे अपने वैवाहिक जीवन में खुश रहने दें. आप भी उस का खयाल दिमाग से निकाल दें और आने वाली जिंदगी के बारे में सोचें.

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