सरिता विशेष

मेरे मातापिता के बीच प्यार में अकसर नोकझोंक होती रहती है लेकिन आजकल घुटने की तकलीफ के चलते मेरी मां खीझ उठती हैं. इसी परेशानी में उन्होंने एक दिन पिताजी से कह दिया कि अमुक काम नहीं हुआ तो वे घर छोड़ कर चली जाएंगी. मैं अपनी मां के इस व्यवहार से बहुत परेशान हूं.
आप के मातापिता में प्यारभरी नोकझोंक होना तो अच्छी बात है. प्यारभरी नोकझोंक किसी भी रिश्ते की उम्र बढ़ाती है. आप की मां के खीझभरे और चिड़चिड़े व्यवहार का कारण उन की घुटनों की तकलीफ है जिस का आप जल्द से जल्द इलाज कराएं. मां को किसी अच्छे आर्थोपैडिक सर्जन को दिखाएं. जब उन की शारीरिक परेशानी दूर हो जाएगी तो उन का रूखा व चिड़चिड़ा व्यवहार भी बदल जाएगा.

मैं 25 साल की विवाहिता हूं. मेरे 2 बच्चे हैं. पिछले दिनों मुझे पता चला कि शादी से पूर्व मेरे पति के अपनी भाभियों के साथ नाजायज संबंध थे. मुझे शक है कि वे संबंध आज भी बरकरार हैं. मैं जब भी पति को अपनी भाभियों के साथ बात करते देखती हूं, मुझे बहुत गुस्सा आता है और सारा गुस्सा बच्चों पर निकलता है.
आप की परेशानी का कारण आप का बेमतलब की जलन करना है. भाभियों से चुहलबाजी को अन्यथा न लें. उन के पतियों को भी आपत्ति होगी. बच्चों को मारनापीटना कोई समझदारी नहीं है. जब तक आप को प्रेम मिल रहा है खुद भी खुश रहिए और पति और बच्चों को भी खुश रखिए.

मैं 55 वर्षीय विकलांग, अकेली, तलाकशुदा महिला हूं. मेरी समस्या यह है कि मैं अपनी 30 वर्षीय बेटी की शादी कैसे करूं? कृपया सही समाधान बता कर मेरी मदद कीजिए.
आप की बेटी अगर शिक्षित और आत्मनिर्भर है तो समाज में उस के योग्य अनेक वैवाहिक रिश्ते मौजूद होंगे. योग्य वर के लिए मैट्रीमोनियल सर्विसेज की भी मदद ले सकती हैं. आप समाजसेवी संस्थाओं की भी मदद ले सकती हैं जो सामूहिक विवाह का आयोजन कराती हैं. तलाकशुदा होने और विकलांगता को अपनी राह का रोड़ा न समझें और साहस व आत्मविश्वास के साथ अपनी बेटी के लिए योग्य वर का चुनाव कर के उस का विवाह कराएं.

मैं 38 वर्षीय विवाहिता हूं. पिछले दिनों मैं ने अपने 12 वर्षीय बेटे को इंटरनैट पर पौर्न साइट देखते हुए पकड़ लिया. मुझे देखते ही वह झेंप गया. उस समय मैं ने भी उस से कुछ नहीं कहा. उस दिन के बाद से वह चुपचाप रहने लगा है. मुझे समझ नहीं आ रहा है मैं इस विषय पर अपने बेटे से बात करूं या नहीं, और करूं तो कैसे करूं?
उम्र के इस बदलाव भरे दौर में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों और गुप्तांगों में होने वाली उत्तेजना किशोरों को पौर्न साइट व अश्लील पत्रपत्रिकाएं देखने को उकसाती हैं. अगर आप इस विषय पर अपने बेटे से बात नहीं करेंगी तो वह चोरीछिपे अन्य गलत तरीकों से अपनी जिज्ञासा शांत करने का प्रयास करेगा. इसलिए आप अपनी झिझक से बाहर निकल कर इस विषय पर खुल कर अपने बेटे से बात करें और उसे सहीगलत की जानकारी दें. पौर्न साइटों पर ज्यादा नाकभौं न चढ़ाएं.

मैं 47 वर्षीय विवाहित पुरुष हूं. पत्नी की उम्र 45 वर्ष है. मेरी समस्या यह है कि पत्नी सैक्स में बिलकुल रुचि नहीं लेती. और तो और, इस विषय पर बात करने से भी कतराती है.
दरअसल, आप की पत्नी इस समय मेनोपोज के काल से गुजर रही हैं. इस समय सैक्स के प्रति अरुचि होना सामान्य है. मेनोपोज के समय एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी से उत्तेजना कम होती है. आप चाहें तो सैक्सोलौजिस्ट या सामान्य डाक्टर से संपर्क कर सकते हैं जो सही काउंसलिंग व दवाओं द्वारा मेनोपोज के प्रभाव को कम करने के उपाय बता सकता है.

मैं 25 वर्षीय शादीशुदा महिला हूं. शादी को 5 साल हो गए हैं. मेरी समस्या यह है कि मेरी ननद अपने 5 बच्चों के साथ हमेशा मेरी ससुराल यानी अपने मायके में लगभग रोज आती रहती है जिस से मेरा जीना हराम हो गया है. अपना घर होते हुए भी मुझे यह घर अपना नहीं लगता. पूरा समय ननद के बच्चों के काम में निकल जाता है. रसोई के कामों से फुरसत नहीं मिलती है. मैं और मेरे पति एकदूसरे के साथ समय नहीं बिता पाते. कोई रास्ता बताइए जिस से मेरी समस्या हल हो जाए.
आप की ननद का ऐसा करना सर्वथा अनुचित है. आप इस बारे में अपने पति व अन्य?घर वालों से बात कीजिए. उन्हें समझाइए कि अगर आप भी आप की ननद की तरह हमेशा अपने मायके में रहेंगी तो न तो आप के ससुराल वालों को अच्छा लगेगा, न ही आप की भाभी को. रिश्ते में मेलजोल अच्छी बात है लेकिन इतना?भी न हो कि इस से दूसरों को परेशानी हो. आप चाहें तो ननद के पति से इस बारे में बात कर सकती हैं. अपनी समस्या से उन्हें अवगत कराएं. अगर वे समझदार होंगे तो अपनी पत्नी को अवश्य समझाएंगे. आप ननद को उन के बच्चों की पढ़ाईलिखाई की तरफ ध्यान दिला कर भी उन का घर में आनाजाना कम करा सकती हैं.

 

मैं 16 वर्षीय 11वीं कक्षा का छात्र हूं. मेरी समस्या यह है कि पिछले कुछ दिनों से मेरे स्कूल के कुछ छात्र मेरे साथ गंदी हरकतें कर रहे हैं. जब मैं उन्हें ऐसा करने से मना करता हूं तो वे मुझे धमकाते हैं. मैं बहुत डर गया हूं. पढ़ाई से भी मेरा ध्यान भटक रहा है. क्या करूं?
आप बिना डरे अपने मातापिता व स्कूल टीचर को इस बारे में खुल कर बताएं. जैसे आप को बदनामी का डर है वैसे उन छात्रों को भी अवश्य होगा.