उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भूमिका बस अपनी हाजिरी दर्ज कराने भर की रह गई है. जबरिया प्रदेश अध्यक्ष बना दिए गए अभिनेता राज बब्बर का काम राहुल गांधी की सभाओं में उन के कंधे से पीछे झांकना मात्र रह गया है. झांकने का यह काम लोकसभा में ज्योतिरादित्य सिंधिया करते हैं.

राज बब्बर को नहीं मालूम कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं. हालत यह है कि अपने वक्त के अच्छे ऐक्टर होने के बाद भी मीडिया उन पर ध्यान नहीं देता. इसी पीड़ा को दूर करने के लिए उन्होंने एक दिलचस्प बात कही कि अब तो मोदी को मोदीजी कहने को मन नहीं करता. चूंकि वे पीएम हैं, इसलिए मजबूरी में उन के नाम के आगे जी लगाना पड़ता है. उन का बस चले तो वे मोदी का नाम तवे के नीचे काली स्याही से लिखें. तवे के नीचे स्याही नहीं, कालिख होती है और हालफिलहाल राज बब्बर के सामने चुनौती यह है कि वे इस किस्म की स्याही को कांग्रेस पर पुतने से कैसे बचाएं.