सरिता विशेष

एक जिद के चलते सरकार ने खरबों रुपए खर्च करते थोक में शौचालय तो बनवा दिए पर नई दिक्कत यह उठ खड़ी हुई है कि इन में से अधिकांश का कोई उपयोग नहीं कर रहा. साफसफाई के अभाव और पानी की कमी के चलते ये मौड्यूलर संकरे शौचालय लोगों के लिए नया सिरदर्द बन गए हैं. इन शौचालयों का भविष्य या मुकाम साफ दिख रहा है कि कचरे के ढेर हैं.

यही बात माइक्रोसौफ्ट के मुखिया बिल गेट्स ने थोड़े शिष्ट शब्दों का इस्तेमाल करते कही कि अगर बैंक खातों में लेनदेन न हो तो वे बेकार हैं. पिछले दिनों भारत आए बिल गेट्स ने निष्क्रिय बैंक खातों की तुलना शौचालयों से करते सरकार की 2 असफलताएं कारोबारी ढंग से बताईं कि नए खुलवाए गए बैंक खातों और शौचालय निर्माण के फैसले अव्यावहारिक थे क्योंकि आम लोगों की जेबें और पेट दोनों खाली हैं जिन का नोटबंदी व जीएसटी के बाद भर पाना मुमकिन भी नहीं लग रहा.