मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आम लोगों को खुश रखने के लिए आनंद विभाग खोला ही था कि उधर दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी खासमखास आनंदी बेन को राज्यपाल बना कर भोपाल भेज दिया. अहमदाबाद से भोपाल तक का सफर आनंदी बेन ने चार्टर्ड बस से तय किया और रास्ते में उज्जैन के महाकाल मंदिर में अभिषेक कर ऐलान सा कर डाला कि वे पूजापाठ के मामले में शिवराज से उन्नीस नहीं हैं यानी कर्ज में गले तक डूबे इस सूबे में अब कुछ और हो न हो, भजनपूजनकीर्तन तबीयत से होंगे.

लेकिन शिवराज सिंह की असल दिक्कत पूजापाठी नहीं, बल्कि सत्ता में आनंदी बेन की दखलंदाजी है जिस के बाबत नई राज्यपाल को शायद ऊपर से ही निर्देश मिले हुए हैं कि उन्हें गवर्नरी कम, मुखबिरी ज्यादा करनी है. इस साल मध्य प्रदेश में चुनाव हैं जहां भाजपा को शिवराज सिंह का चेहरा आगे रख कर ही चुनाव लड़ने को मजबूर होना पड़ेगा. अब देखना दिलचस्प होगा कि राजकाज राजभवन से चलेगा या सीएम हाउस से.

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