बगैर पंख उड़ान

रस्सी जल गई पर बल नहीं गया वाली पुरानी कहावत रेणुका चौधरी जैसी कई नेताओं पर चरितार्थ होते देखी जा सकती है. तेलंगाना से कांग्रेस की ये सांसद आम महिलाओं की तरह 20 फरवरी को दिल्ली एअरपोर्ट के शौपिंग एरिया में खरीदारी में व्यस्त रहीं तो उन के इंतजार में हवाई जहाज को 45 मिनट रोक कर रखा गया. दिल्ली से हैदराबाद जा रही फ्लाइट में रेणुका ने अपना सामान रख दिया लेकिन वे यह भूल गईं कि कांग्रेस अब सत्ता में नहीं है और उस की कई वजहों में से एक है उस की मनमानी और लोकतंत्र को जमींदारी समझ लेना सत्ता बुरी चीज नहीं है, बुरी बात है उसे अपनी बांदी मान लेना. कांग्रेसियों को समझनेसमझाने में वक्त तो लगेगा कि अब उन की ठसक ज्यादा नहीं चलेगी. एअर इंडिया को चाहिए कि वह भ्रम में जी रहे ऐसे भूतपूर्व रसूखदारों से हर्जाना वसूले.

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आप ही आप हैं

आम आदमी पार्टी वाकई विचित्र है. वह टूटने के कगार पर है या नहीं, इस पर शोध की तमाम संभावनाएं हैं. योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे नेताओं की इस में कमी नहीं है जो गुजरे कल के टीवी पत्रकार, वकील या कवि वगैरह हैं. इन चेहरों का कोई जनाधार नहीं है. यानी वे सहायक अभिनेता हैं जिन्हें गलतफहमी हो जाती है कि फिल्म हम से है, हम फिल्म से नहीं. हकीकत में इस के निर्विवाद मुखिया और हीरो अरविंद केजरीवाल ही हैं. चूंकि सुपरमैन नहीं हैं इसलिए अकेले दिल्ली सरकार नहीं चला सकते. अपनी सहूलियत और सहायता के लिए उन्होंने कुछ असफल प्रतिभावानों को मौका दिया. अब वे हायहाय करते रहते हैं कि देखो, मनमानी हो रही है. ये लोग अपने दम पर यानी बगैर अरविंद केजरीवाल के, शायद 1 हजार वोट भी न हासिल कर पाएं जो लोकतंत्र की ताकत होती है.

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मौत की अफवाह

बुजुर्ग अभिनेता दिलीप कुमार की मौत की झूठी खबर एक बार फिर आई तो लगा कि अनुमान आधारित पत्रकारिता कितनी खतरनाक और हास्यास्पद होती है. मीडिया एक साल में 3 बार दिलीप कुमार को मृत घोषित कर चुका है. शुरू में तो उन की अभिनेत्री पत्नी सायराबानो सफाई देती थीं पर थकहार कर उन्होंने अब सफाई देना बंद कर दिया है. खबरों का टोटा नहीं है, न ही कभी होगा पर टीआरपी बढ़ाने वाली चटपटी खबरें अगर न्यूज चैनल्स पैदा करेंगे तो अपनी विश्वसनीयता ही खोएंगे. अब कौन इन भले मनुष्यों को समझाए कि किसी बीमार बुजुर्ग के अस्पताल में भरती होने का एक ही मतलब यह नतीजा नहीं होता. न्यूज चैनल पर पहले दिखाने की होड़ का खमियाजा दिलीप कुमार जैसे अभिनेताओं और उन के प्रशंसकों को भुगतना पड़ता है तो यह उन के साथ ज्यादती ही कही जाएगी.

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ज्ञान प्राप्ति

देर से ही सही उमा भारती को ज्ञान प्राप्त हो रहा है कि नदियों को सब से ज्यादा प्रदूषित हिंदू समाज के लोग यानी भक्त व श्रद्धालु करते हैं. कैसे करते हैं यह किसी भी नदी के किनारे जा कर देखा जा सकता है. दिल्ली में अकसर घुटन महसूस करने और खामोश रहने वाली उमा जब भी अपनों के बीच आती हैं तो उन का चेहरा खिल उठता है और वे अच्छीअच्छी बातें भी करने लगती हैं. अपने गृहनगर टीकमगढ़ में होली के दिनों में वे आईं तो अनौपचारिक बातचीत में पत्रकारों के सामने मान बैठीं कि हिंदू श्रद्धालु ही सब से ज्यादा नदियों को खराब करते हैं. लेकिन नदियों को खराब करवा कर दक्षिणा बटोरने वाले पंडों के बारे में वे कुछ नहीं बोलीं न ही कभी बोलेंगी क्योंकि यह ज्ञान की अति हो जाएगी जिसे उच्च और श्रेष्ठ हिंदू बरदाश्त नहीं करेगा.