‘आखिर हर्ज क्या है’, ये 4 शब्द बेहद समझौतावादी हैं जिन का इस्तेमाल 23 मई को उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी ने भी कर डाला. बकौल सलमा, ओम के उच्चारण से औक्सीजन मिलती है और यह योग का ही प्रताप है कि उन की रीढ़ की हड्डी टूटने से बची. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ओम बोले जाने की अनिवार्यता पर आयुष मंत्रालय ने अपने कदम वापस खींच लिए हैं जिस का कुछ मुसलिम धर्मगुरु कड़ा विरोध इसलाम की दुहाई देते कर रहे थे. योग एक धार्मिक कृत्य है और ओम एक धार्मिक शब्द है, ये बातें किसी सुबूत की मुहताज नहीं हैं. जिन लोगों को असहिष्णुता के मुद्दे पर गलतफहमी या खुशफहमी है, उन्हें योग दिवस मनाए जाने के इतिहास का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए कि पहले योग और सूर्य नमस्कार का भी विरोध होता था जो अब नहीं होता. उम्मीद है 2-4 साल बाद ओम का भी विरोध बंद हो जाएगा.  ऐसी लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्षता को सलाम ठोकने के लिए सलमा अंसारी और नजमा हेपतुल्ला जैसी बुद्धिजीवी महिलाओं की उदार भूमिका के पीछे कोई डर या लालच काम कर रहा हो तो हैरानी नहीं होनी चाहिए. अब भला कौन धर्म को ताक में रखते राष्ट्रपति नहीं बनना चाहेगा.