5 राज्यों में चुनावप्रचार करने के लिए स्टारप्रचारकों की सूची में भाजपा ने इस बार लालकृष्ण आडवाणी का नाम  शामिल नहीं किया है. इस खबर या ज्यादती से किसी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा, तो जाहिर है कि आडवाणी अपनी उपयोगिता खो बैठे हैं और उन का खेमा, अघोषित तौर पर नरेंद्र मोदी ने तितरबितर कर दिया है. ये वही आडवाणी हैं जिन के बगैर कभी भाजपा चुनावी रणनीति के बारे में सोच भी नहीं पाती थी. अब हालत यह है कि उन के बिना ही सोचती है.

जाहिर है हिंदुत्व और राममंदिर जैसे उबाऊ मुद्दों से छुटकारा पाने के लिए भी उसे उन से किनारा करना पड़ रहा है.  वैसे भी, कांग्रेस की तर्ज पर शासन कर रही भाजपा में सिवा नरेंद्र मोदी के कोई और स्टार है नहीं. ऐसे में आडवाणी को वह दोहा याद आ रहा हो कि, ‘पुरुष बलि नहीं होत है समय होत बलबान,’ तो कोई संशय नहीं.  

 

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