भगवान के दरबार यानी मंदिर में सब एक हैं, यह बात भी भगवान के अस्तित्व की तरह एक अवधारणा भर है. सच यह है कि मंदिर और भगवान सिर्फ पैसों वालों के लिए हैं और एक वर्ग विशेष की खुराफात की देन हैं. इस फलसफे से दूर हुआ यों कि शिवरात्रि के मौके पर साध्वी उमा भारती उज्जैन के महाकाल मंदिर में पूजाअर्चना करने पहुंचीं तो सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने उन्हें गर्भगृह में जाने से रोक दिया.

इस पर उमा ने जो तांडव मचाया तो हाहाकार मच गया. वे वहीं धरने पर बैठ गईं. 7-8 मिनटों के अल्पकालिक धरने के बाद उन्हें इजाजत मिल गई यानी नियम बदल दिया गया. उमा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की भी खिंचाई कर डाली. उमा की बौखलाहट शबाब पर है. इस की वजहें कुछ भी हों पर उजागर हो गया कि साध्वी, संत, साधुओं को मंदिरों में जाने की उसी तरह छूट है जैसे रेलकर्मियों को रेलवेस्टेशनों पर घूमते रहने के लिए किसी पास या इजाजत की जरूरत नहीं पड़ती.