नरेंद्र मोदी और अमित शाह की अदालत में नवजोत सिंह सिद्धू का मुकदमा 2 साल से लंबित पड़ा था जिस में सिद्धू ने अपनी व्यथा बताते इंसाफ की गुहार लगाई थी कि या तो केंद्रीय मंत्री बना दो या फिर पंजाब का मुख्यमंत्री प्रोजैक्ट कर दो वरना मुझे पार्टी छोड़ने को मजबूर होना पड़ेगा. इधर, इस डबल बैंच को मामले यानी सिद्धू में दम नजर नहीं आया. लिहाजा, तारीख पर तारीख लगती रहीं और आखिर में थकहार कर खुद सिद्धू ने अपना वाद पत्र वापस ले लिया यानी भाजपा से इस्तीफा दे दिया.

अब अपना फैसला खुद सिद्धू को करना है कि वे लोगों को कौमेडी शो के जरिए हंसाते रहेंगे या दिल में जनता की सेवा व कल्याण का जज्बा लिए सियासी मैदान में ताल ठोकेंगे. इस बाबत वे आम आदमी पार्टी का दामन भी थाम सकते हैं और चाहें तो खुद की भी छोटीमोटी पार्टी बना सकते हैं जिस की सचिव जाहिर है उन की पत्नी नवजोत कौर रहेंगी.