सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाले मामले में झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले से जुड़े सभी मामलों में आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का फैसला क्या दिया, बिहार की राजनीति फिर गरमा उठी. लालू पर साढ़े साती की यह तीसरी अढ़ैया है. बीते ढाई सालों का अरसा ही वे सुकून से गुजार पाए हैं.

लालू की असल दिक्कत है भाजपा द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री और उन के सहयोगी नीतीश कुमार को दिया यह औफर कि लालू का साथ छोड़ो तो हम समर्थन देने को तैयार हैं. आजकल की राजनीति में ‘कभी भी, कुछ भी हो सकता है’ की थ्योरी के तहत अगर नीतीश कुमार ने वाकई इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर डाला तो लालू परिवार पर संकट के जो बादल मंडाराएंगे वे फिर शायद ही कभी छंट पाएं. ऐसे में लालू के लिए बेहतर है कि वे यों ही सिर झुकाए नीतीश की हां में हां मिलाते शनि आराधना करते रहें.

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