ऐसा भी होता है

सच्चे व् अनूठे अनुभव जो आपको बहुत कुछ सीखा जाएं

October 26, 2015
सरिता विशेष

कालोनी की पानी की टंकी के ऊपर मधुमक्खियों ने बड़ेबड़े छत्ते बना रखे थे. एक रविवार को सुबहसुबह कालोनी के सभी घरों के दरवाजों की घंटियां बज उठीं. सामने खड़े कुछ आदमियों, जो देखने में ग्रामीण दिख रहे थे, ने बताया कि वे लोग गांव से आए हैं और मधुमक्खियों के छत्ते तोड़ने का उन का पेशा है. हम सब से उन्होंने अनुरोध किया कि पानी की टंकी के छत्ते तोड़ने का ठेका उन्हें मिला है. कृपया हम अपने घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद कर लें और एक घंटे तक बाहर न निकलें. चूंकि मधुमक्खियां चारों तरफ उड़तीं और किसी को भी काट लेतीं, इसलिए हम सब ने फौरन दरवाजेखिड़कियां बंद कर लीं और बच्चों को सख्त हिदायत दी कि कोई भी बाहर न निकले. एक घंटे बाद वही लोग बाल्टियां लिए हुए फिर से दरवाजों की घंटियां बजाते चले आए, सब को बोलते हुए कि हम ने ताजाताजा शहद निकाला है, ले लीजिए. कई लोगों ने जल्दीजल्दी खरीद भी लिया. जब वे लोग चले गए और हम सब घरों से बाहर निकले तो देखा कि टंकी पर मधुमक्खियों के छत्ते ज्यों के त्यों लगे हुए थे. कोई भी छत्ता तोड़ा नहीं गया था. असल में वे लोग शकर की चाशनी बेच कर पूरी कालोनी को बुद्धू बना कर चले गए थे. चूंकि कोई भी घर के बाहर निकला नहीं था तो किसी को पता भी नहीं चला था कि छत्ते टूटे भी हैं या नहीं.

अनीता सक्सेना, भोपाल (म.प्र.)

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एक दिन मैं कुछ सामान लाने दुकान पर गई. वापसी में रास्ते के किनारे एक आटो खड़ा था. उस के पास एक बुजुर्ग सरदारजी खड़े थे. वे उस आटो के ड्राइवर थे. मैं ने उन्हें झुक कर नमस्ते किया और आगे बढ़ गई. थोड़ी दूर जाने के बाद एक आटो मेरे नजदीक आ कर रुका और उस आटो के ड्राइवर ने कहा कि वे सरदारजी आप को बुला रहे हैं. मुझे लगा मेरा कुछ गिरा होगा तो मैं वहां गई. सरदारजी पास वाले ठेले से चाय ले कर पी रहे थे. मेरे जाने से वे मुझे भी चाय पीने को कह रहे थे. मैं ने कहा, ‘‘मैं अभी पी कर आ रही हूं, शुक्रिया.’’ तो भी वे पीने के लिए कह रहे थे. मैं ने मना कर दिया और फिर नमस्कार कह कर आगे चल पड़ी. मैं सोच रही थी कि ऐसे भी इंसान मिलते हैं.

एन सरकार, कालकाजी (न.दि.)

ऐसा सिर्फ इंडिया में ही होता है

महंगाई की मार के बावजूद हमारे यहां कुछ लोगों की खर्च करने की क्षमता अच्छी है और अच्छी क्वालिटी के सामान के खरीदारों की जमात लगातार बढ़ती जा रही है.

सरिता विशेष

आप को याद होगा जब स्कूटर पाने के लिए फौर्म भरने वालों को लंबी कतार में खड़ा हो कर बारी का इंतजार करना पड़ता था और फौर्म भरने के बाद सालों तक घर पर स्कूटर नहीं पहुंचता था. मंत्री या सांसद की सिफारिश पर वह काम आसान होता और खरीदार विजेता की मुद्रा में शान की सवारी पर निकलता. यही हालत रसोई गैस के कनैक्शन और टैलीफोन कनैक्शन हासिल करने के लिए भी रही. पूर्व संचार मंत्री सुखराम को तो इस की वजह से भ्रष्टाचार करने का अवसर मिला और वे दूरसंचार क्षेत्र में भ्रष्टाचार करने वाले देश के पहले केंद्रीय मंत्री बने. बाद में घोटाले के परिवेश बदले और स्पैक्ट्रम नीलामी के जरिए घोटाले हुए.

अच्छी बात यह है कि इधर घोटाले सेवाप्रदाता तक ही सीमित हैं. यदि सरकारी कंपनी उपकरण बना रही होती तो घोटाले का मानक ही बदल गया होता. इस आशंका की वजह भारतीय बाजार में आ रहे नए उपकरणों की बेतहाशा मांग को माना जा सकता है.

एकाध साल पहले एप्पल ने भारत में अत्याधुनिक पैड जारी किया तो उस की बिक्री करने वाली दुकानों पर ग्राहकों की लंबी लाइन लग गई. हाल ही में गूगल ने स्मार्टफोन नैक्सस-5 लौंच किया तो इस का स्टौक 1 घंटे के भीतर ही खत्म हो गया. यह उपकरण गूगल के लिए कोरियाई एलजी कंपनी ने बनाया है और भारत में जिस तरह उस का स्वागत हुआ उसे देख कर कंपनी प्रबंधन को कहना पड़ा कि एक तरह से लूट मच गई थी.

गूगल कंपनी के निदेशक (भारत) सून नोन ने कहा कि वे नैक्सस-5 को मिले रिस्पौंस से बेहद उत्साहित हैं और ऐसा सिर्फ इंडिया में ही हो सकता है. भारतीय ग्राहकों के इस उत्साह को बनाए रखने के लिए सून ने कहा कि अब इस से भी तेज गति के नैक्सस मौडल भारत में उतारे जाएंगे.

इस में कोई संदेह नहीं कि महंगाई की मार के बावजूद हमारे यहां कुछ लोगों की खर्च करने की क्षमता अच्छी है और अच्छी क्वालिटी के सामान के खरीदारों की जमात लगातार बढ़ती जा रही है. भारतीय बाजार की विविधता विदेशी कंपनियों, खासकर मोबाइल उपकरण बनाने वाली कंपनियों को आकर्षित करती रही है.