स्तंभ

जीवन की मुसकान
By | 16 April 2017
मैं अपनी बेटी के पास अहमदाबाद गई थी. सुबह की सैर के बाद जब हम सब चाय पी रहे थे तो देखा मेरे बाएं हाथ में सोने का कड़ा नहीं था.