रिलायंस जियो ने दूरसंचार बाजार में प्रवेश कर जो धमाल मचाया उस ने इस क्षेत्र में मालामाल होने वाली कंपनियों के दांत खट्टे कर दिए. जियो ने ग्राहकों को निशुल्क वौयस कौलिंग जैसी सुविधा दे कर भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में ऐसी क्रांति पैदा कर दी कि हर हाथ में स्मार्टफोन पहुंच गया. बाजार की हर कंपनी चिंतित हो गई और ग्राहकों को बचाने के लिए कंपनियों को अपनी दरों में कटौती करनी पड़ी.

प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए इंटरनैट की सुविधा लगभग निशुल्क दी गई जिस के कारण 2017 में दूरसंचार कंपनियों का राजस्व अत्यधिक गिर गया. बाजार में पहले से मौजूद कंपनियों को नुकसान से बचने के लिए एकदूसरे से जुड़ना पड़ा और एअरसेल जैसी कंपनी ने अपने दीवालिया होने के लिए आवेदन कर दिया. टाटा टैलीसर्विसेस, रिलायंस कम्युनिकेशन तथा टैलीनौर बाजार से लगभग बाहर हो गईं और आइडिया तथा वोडाफोन को मिल कर इस आंधी का मुकाबला करना पड़ा. रिलायंस जियो और एअरटेल ही बाजार में छाए रहे. एअरटेल को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ा.

सरकार का कहना है कि दूरसंचार कंपनियों के साथ ही उसे भी इस क्षेत्र में राजस्व का भारी नुकसान हुआ है. उस का राजस्व बड़े स्तर पर घटा है. इस बीच सरकार ने इस क्षेत्र का राजस्व बढ़ाने के उपायों पर विचार करना शुरू कर दिया है. इन प्रयासों का दूरसंचार बाजार पर बड़ा असर पड़ेगा. खुद सरकार का कहना है कि अब इस क्षेत्र में सुधार होना शुरू हो जाएगा. कंपनियों को भी उम्मीद है कि उन का राजस्व बढ़ेगा.

दूरसंचार कंपनियां प्रतिस्पर्धी बनने के लिए बाजार में निशुल्क डाटा तो देती रहीं, ग्राहकों को लुभाने की आकर्षक योजना शुरू करती रहीं लेकिन डाटा स्पीड बहुत कम होने के कारण ग्राहक निर्धारित डाटा का इस्तेमाल नहीं कर पाता और कई बार ग्राहक से निर्धारित शर्त के विपरीत अतिरिक्त पैसे की मांग की जाती है.

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