बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई के सूचकांक में इस साल की शुरुआत से ही गिरावट का रुख रहा है लेकिन 20 जनवरी को बाजार में भूचाल आ गया और सूचकांक 640 अंक गिर कर 20 माह के निचले स्तर पर आ कर 24 हजार अंक नीचे चला गया.

मोदी सरकार के कार्यकाल में सूचकांक अब सब से निचले स्तर पर पहुंचा है. पिछले वर्ष मार्च के बाद सूचकांक 6 हजार अंक तक गिर चुका है जबकि इस साल अकेले जनवरी में बाजार 8 प्रतिशत यानी 2,055 अंक तक गिर चुका है. रुपए में भी डौलर के मुकाबले जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है. इस गिरावट की वजह विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमत के 12 साल में सब से निचले स्तर पर पहुंचने और चीन में अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट को माना जा रहा है. चीन में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की दर 25 साल में सब से ज्यादा सुस्ती पर है. वह दुनिया की तेजी से बढ़ती और दूसरी सब से बड़ी अर्थव्यवस्था है और ड्रैगन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार 1990 के बाद अब सब से कमजोर है जिस से वैश्विक बाजारों में हलचल है.

चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट की वजह उस के निर्यात में गिरावट को बताया जा रहा है जिस का बड़ा असर उस के शेयर बाजार पर पड़ा और चीनी स्टौक मार्केट धराशायी हुआ है. नतीजतन, विश्व के वित्तीय बाजार में खलबली मची. चीन में औद्योगिक विकास की दर में भी जबरदस्त गिरावट आई है. इन सब कारणों से उस की अर्थव्यवस्था ढही है जिस का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार में देखने को मिला है.

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