संसद के मौनसून सत्र के पहले दिन मोदी सरकार ने छोटे निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए पोंजी योजनाओं को प्रतिबंधित करने वाला विधेयक लोकसभा में पेश किया. इस विधेयक का मकसद लोगों को लुभावने औफर दे कर अपने पसीने की कमाई पूंजी को जमा करने के लिए उकसाने और फिर उसे ले कर फरार होने वाले लोगों पर नकेल कसना है.

इस धंधे में लगे गिरोह अब तक हजारों लोगों की करोड़ों की कमाई डकार चुके हैं और सरकार उन्हें रोकने की कोशिश भी कर रही है, लेकिन वह इसे रोकने में असफल रही है. इस कानून में 10 साल की कैद की सजा का प्रावधान किया गया है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 के बजट में इस तरह का विधेयक लाने की बात कही थी, लेकिन विधेयक करीब डेढ़ साल बाद लाया गया है. इस विधेयक की अच्छी बात यह है कि किसी पोंजी कंपनी द्वारा घपला करने की बात सामने आने से पहले कंपनी के खिलाफ कार्यवाही कर लोगों का पैसा बचाया जा सकता है. विधेयक का मकसद अवैध कंपनियों को लोगों का पैसा जमा करने से रोकना है. इस के साथ ही, सरकार फर्जी कंपनियों पर भी लगाम लगा रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि ढाई लाख फर्जी कंपनियों पर ताला लगाया गया है और बड़ी संख्या में कंपनियां सरकार के रडार पर हैं.

इधर, जेल की सजा काट रहे आसाराम बापू की फर्जी कंपनियों पर छापे पड़ रहे हैं. इन सब का मकसद भोलीभाली जनता को लूटना है. इन चोरों के लिए 10 साल की सजा नहीं, बल्कि आजीवन कारावास होना चाहिए. शिकायत होते ही उन्हें जेल पहुंचाया जाना चाहिए.

हमारे समाज में पढ़ेलिखे लोगों की संख्या बढ़ रही है, इस के बावजूद लोग बेवकूफ बन रहे हैं और फर्जी कंपनियां में पैसा लुटा रहे हैं. हमें खुद सतर्क रहने की जरूरत है.