सरिता विशेष

शेयर बाजार में इस बार कई कारणों से झटकेदरझटके आते रहे हैं जिस के कारण बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई का सूचकांक तेजी से ढहता रहा. पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के दूसरी पारी से बाहर होने की घोषणा का बाजार पर नकारात्मक रुख दिखा.

उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकाल पूरा होने के बाद वे पद छोड़ देंगे. इस से बाजार ढह गए लेकिन इसी बीच, देश के सब से बड़े स्टेट बैंक औफ इंडिया यानी एसबीआई के साथ उस के 5 सहयोगी बैंकों के विलय की खबर से सूचकांक फिर मजबूती पकड़ने लगा तो तभी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने के समर्थन में जनमत संग्रह का परिणाम सामने आ गया. इस के कारण न सिर्फ बीएसई सूचकांक धराशाई हुआ बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों में भूचाल आ गया. चारों तरफ शेयर बाजारों में महामारी जैसी स्थिति बन गई.

इस महामारी को तब और झटका लगा जब ईयू के कुछ अन्य मुल्कों से भी ब्रिटेन की तरह जनमत संग्रह की अनुगूंज सुनाई देने लगी. संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि ब्रिटेन के मामले में अब कोई विचार नहीं किया जाएगा और उसे जल्द से जल्द अलग होने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. हालांकि इस प्रक्रिया को पूरा होने में 2 वर्षों  का वक्त लग सकता है.