सरिता विशेष

20 फरवरी को मुंबई शेयर बाजार का सूचकांक करीब 200 अंक चढ़ कर 5 माह के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ. आईटी क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में इस दौरान जम कर खरीदारी हुई जिस का बाजार पर पूरे समय सकारात्मक रुझान रहा.

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन को आईटी क्षेत्र की प्रमुख रिलायंस कंपनी के शेयर 8 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए. कंपनी ने इस से पहले ऐलान कर दिया था कि 1 अप्रैल से वह अपने जियो सिम की सेवाएं मुफ्त में उपलब्ध नहीं कराएगी बल्कि अन्य कंपनियों की तुलना में कम दाम पर सेवाएं देगी.

इसी बीच, आईटी क्षेत्र की एक अन्य प्रमुख कंपनी भारती एअरटेल ने घोषणा की थी कि उस का नौर्वे की कंपनी टेलीनौर की भारतीय इकाई को खरीदने का सौदा पक्का हो गया है. दोनों कंपनियों के बीच इस के लिए लंबे समय से बातचीत चल रही थी. देश की 2 बड़ी आईटी कंपनियों के इस सौदे से बाजार में जोरदार चहलपहल रही, जिस के कारण सूचकांक सितंबर 2016 के बाद पहली बार 29,000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर तक और नैशनल स्टौक ऐक्सचेंज का सूचकांक 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया.

सूचकांक की इस बढ़त की बुनियाद में पहले सप्ताह के दौरान बाजार में लगातार रहा तेजी का माहौल और वैश्विक स्तर पर मिले अच्छे संकेत भी रहे. इस की एक वजह भारतीय रिजर्व बैंक का वह निर्णय भी है जिस में बैंक ने विदेशी निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति दी. इसी दौरान भारतीय विनिमय और प्रतिभूति बोर्ड यानी सेबी की तरफ से एक महत्त्वपूर्ण बयान आया कि बाजार में कुछ कंपनियों के शेयरों में आने वाले उछाल पर नजर रखने के लिए एक प्रणाली विकसित की जा रही है. इस व्यवस्था के लागू होने से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और कंपनियों के शेयरों में आने वाली बनावटी उछाल पर रोक लगेगी.

बाजार के जानकारों का कहना है कि यह तेजी स्थायी नहीं है. अभी अमेरिकी फैड रिजर्व की मौद्रिक नीति घोषित होनी है और वहां ब्याजदरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिस का वैश्विक बाजारों पर गहरा असर पड़ना निश्चित है.