सरिता विशेष

देश का सब से बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई दुनिया के 50 शीर्ष बैंकों में शुमार हो गया है. इस के  साथ ही बैंक के ग्राहकों की संख्या 37 करोड़ के पार पहुंच गईर् है. एसबीआई के साथ उस के 6 सहयोगी बैंकों का विलय हुआ है जिन में महिला बैंक, स्टेट बैंक औफ बीकानेर ऐंड जयपुर, स्टेट बैंक औफ हैदराबाद, स्टेट बैंक औफ त्रावणकोर शामिल हैं.

बैंकों का विलय एक अप्रैल से प्रभावी हो गया है. बैंक के कर्मचारियों की संख्या पौने 3 लाख हो गई है जिन में करीब 70 हजार कर्मचारी उस के साथ शामिल हुए बैंकों के हैं. इस विलय के कारण एसबीआई के ग्राहक और कर्मचारी ही नहीं बढ़े हैं, बल्कि उस की शाखाएं भी अब 24 हजार से ज्यादा हो गई हैं और एटीएम बढ़ कर 59,000 हो गए हैं. बैंक की जमा रकम 26 लाख करोड़ रुपए और कर्ज की रकम 18.50 लाख करोड़ रुपए हो गई है. कमाल यह है कि बैंक ने अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की योजना निकाली लेकिन सिर्फ 28 हजार कर्मचारी ही वीआरएस के लिए तैयार हुए हैं. इस सब से बड़े बैंक की अध्यक्ष अरुंधती भट्टाचार्य ने कर्जमाफी को गलत परंपरा करार दे कर किसानों के कर्ज को माफ करने की राजनीति करने वाले नेताओं की भौहें चढ़ा दी थीं. वे रघुराम राजन के बाद रिजर्व बैंक के शीर्ष पद की दौड़ में शामिल रही हैं.

स्टेट बैंक दरों में जो नीति तय करता है, अन्य बैंक लगभग उस का अनुसरण करते हैं. आश्चर्य यह है कि इतनी संपत्ति, ग्राहक और शाखाओं के  बावजूद देश का यह सब से बड़ा बैंक दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में शामिल है जबकि उम्मीद यह थी कि यह शीर्ष 20 बैंकों में पहुंच जाएगा.