टैलीविजन समाचार चैनलों की बाढ़ तथा इंटरनैट के प्रभाव के कारण सूचना की दुनिया में आए क्रांतिकारी बदलाव के बीच यह अवधारणा बढ़ती जा रही है कि अब प्रिंट मीडिया धीरेधीरे महत्त्वहीन हो रहा है. समाचारपत्र, पत्रिकाएं और प्रिंट मीडिया का आधार न्यूज एजेंसियों का महत्त्व अब कम हो रहा है लेकिन औडिट बयूरो औफ सर्कुलेशन यानी एबीसी की ताजा रिपोर्ट उन अटकलों को खारिज करती है. अखबारों और पत्रिकाओं के सर्कुलेशन को प्रमाणित करने वाली इस मानक संस्था ने कहा है कि 2008 से 2015 के बीच प्रिंट मीडिया का सर्कुलेशन 5.04 प्रतिशत बढ़ा है.

देश की विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित पत्रपत्रिकाओं के सर्कुलेशन पर मानक रिपोर्ट देने वाली इस संस्था का कहना है कि प्रिंट मीडिया का काम प्रभावित नहीं हुआ है और जबरदस्त प्रतिस्पर्धा के बीच देश में प्रिंट मीडिया का विस्तार हो रहा है. प्रिंट मीडिया को टीवी, न्यूज पोर्टल, रेडियो तथा अन्य डिजिटल माध्यमों से जबरदस्त चुनौती मिल रही है.

एबीसी के दैनिक और साप्ताहिक सदस्य अखबारों की संख्या करीब पौने सात सौ है और पत्रिकाओं की संख्या 50 से अधिक है. ये सभी हर 6 माह में अपने सर्कुलेशन की रिपोर्ट एबीसी को सौंपते हैं और फिर तीसरी पार्टी के जरिए उन के सर्कुलेशन का प्रामाणिक विश्लेषण किया जाता है.प्रिंट मीडिया के लिए यह अच्छी खबर है. बड़े अखबारों का आज भी बाजार में दबदबा है. प्रभावशाली मंत्री कई बार सिर्फ प्रिंट मीडिया के लोगों को बुला कर उन से बात करते हैं जबकि वे टीवी चैनलों की घरघर तक की पहुंच से परिचित हैं.